गौ संरक्षण के लिए संत की अनोखी पहल: 13 साल से पैदल यात्रा कर रहे; अब तक 1.35 लाख किमी का सफर पूरा – rajgarh (MP) News h3>
गो माता के संरक्षण के लिए संत आनंद गोपाल सरस्वती महाराज बीते 13 वर्षों से पैदल यात्रा कर रहे हैं। मंगलवार को वे सिंगरौली से करीब 850 किलोमीटर की पदयात्रा कर राजगढ़ जिले के खिलचीपुर पहुंचे। यह यात्रा 31 वर्षों तक चलने वाली आध्यात्मिक और पर्यावरण चेतना
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राजस्थान से हुई शुरुआत, अब तक तय कर चुके 1.35 लाख किमी
संत आनंद गोपाल सरस्वती महाराज ने बताया कि यह यात्रा 4 दिसंबर 2012 को राजस्थान के हल्दीघाटी से उनके गुरु स्वामी गोपाला नंद सरस्वती द्वारा शुरू की गई थी। अब तक इस यात्रा को 13 वर्ष पूरे हो चुके हैं, और यह पूरे भारत में 3.5 लाख किलोमीटर की दूरी तय करेगी।
तीन राज्यों में पूरी हो चुकी यात्रा
संत ने बताया कि यात्रा अब तक राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में पूरी हो चुकी है। वर्तमान में यह मध्यप्रदेश के अनूपपुर, बुरहानपुर और सिंगरौली में तीन भागों में चल रही है, और जल्द ही महाराष्ट्र में प्रवेश करेगी। वे प्रतिदिन 20 किलोमीटर पैदल चलते हैं और गांव-गांव जाकर गौ माता की महिमा पर प्रवचन देते हैं।
अब तक यह यात्रा 26,000 से अधिक गांवों तक पहुंच चुकी है। प्रवचनों के माध्यम से ग्रामीणों को गौ माता के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
गाय केवल पशु नहीं, बल्कि माता है
संत ने कहा कि गाय को सिर्फ एक जानवर मानने की मानसिकता को बदलना जरूरी है। सनातन काल से गाय को ‘गौ माता’ का दर्जा प्राप्त है, लेकिन आधुनिक समय में इसे केवल एक पशु समझा जाने लगा है। इस सोच को बदलने के लिए वह गांव-गांव में जाकर लोगों को गौ माता के महत्व और संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यात्रा के प्रचार-प्रसार के बाद अब हजारों लोगों ने अपने घरों में गाय पालना शुरू कर दिया है, और गाय के दूध व गोमूत्र के उपयोग को अपनाया है।
यात्रा के सख्त नियम, नंगे पैर चलते हैं संत
इस यात्रा के कुछ कड़े नियम हैं, जिनका सख्ती से पालन किया जाता है
- नंगे पैर चलना
- दान, अनाज या पैसे स्वीकार नहीं करना
- किसी के घर में प्रवेश नहीं करना
- गद्दे पर विश्राम नहीं करना
18 वर्षों तक जारी रहेगा संकल्प
संत आनंद गोपाल सरस्वती महाराज ने बताया कि यात्रा अभी अगले 18 वर्षों तक जारी रहेगी, कुल 31 वर्षों की यात्रा होगी। संतों का मानना है कि जब तक पूरे भारत में गौ माता की महिमा पुनः स्थापित नहीं होती, तब तक यह संकल्प जारी रहेगा। गौ माता के संरक्षण के इस अभियान में हजारों लोग जुड़ चुके हैं, और यह जन जागरूकता अभियान भविष्य में और भी विस्तृत रूप लेगा।
