गोंडा में घाघरा नदी पर तीन स्पर बनाए जा रहे: 8.5 करोड़ की लागत से मानसून से पहले पूरा होगा काम, कटान रोकने की कवायद तेज – Gonda News h3>
गोंडा17 मिनट पहले
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गोंडा जिले के कर्नलगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी की कटान से बचाव के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। बहुवनमदार माझा गांव के पास एल्गिन चरसड़ी तटबंध पर तीन नए स्पर (रक्षक संरचना) का निर्माण किया जा रहा है। पिछले साल इसी इलाके में घाघरा ने एक किलोमीटर तक कटान करते हुए तटबंध के करीब दस्तक दे दी थी, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल तबाह हो गई थी।
8.5 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे तीन स्पर
बाढ़ खंड विभाग द्वारा बनाए जा रहे इन तीनों स्परों की कुल लागत करीब 8.5 करोड़ रुपए है।
- पहला स्पर: 110 मीटर लंबा, लागत ₹2.78 करोड़
- दूसरा स्पर: 100 मीटर लंबा, लागत ₹2.95 करोड़
- तीसरा स्पर: 140 मीटर लंबा, लागत ₹2.12 करोड़
निर्माण कार्य 27 मार्च से शुरू हुआ था और इसे 29 जून तक पूरा करने की डेडलाइन दी गई है। फिलहाल 70% काम पूरा हो चुका है।
पॉलीमर जाली से मजबूत होगी रुकावट
इस बार स्परों के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। बोल्डर पिचिंग को पॉलीमर जाली के अंदर किया जा रहा है, जिससे स्पर ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होंगे। घाघरा के तेज बहाव को रोकने के लिए जाली के भीतर बोल्डर जमाए गए हैं, ताकि पानी की धार टकराकर दिशा बदल ले।
सख्त निगरानी, मशीनों के साथ मजदूर तैनात
बाढ़ खंड विभाग की ओर से काम की सतत निगरानी हो रही है। साइट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे प्रदेश स्तर तक मॉनिटरिंग हो रही है। पोकलैंड, जेसीबी जैसी भारी मशीनों के साथ मजदूरों की पूरी टीम दिन-रात काम में जुटी है।
पिछली बार बड़ी मुश्किल से बचा था तटबंध
पिछले साल घाघरा नदी की कटान से हालात गंभीर हो गए थे। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए एल्गिन चरसड़ी तटबंध को कटने से बचा लिया था, वरना दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाता। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पहले से तैयारी की जा रही है।
अधिकारी बोले- इस बार पहले से बेहतर काम
बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता पंकज आर्या ने बताया, “इस बार तीनों स्पर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाए जा रहे हैं। पिचिंग के लिए पॉलीमर जाली का उपयोग किया गया है। पिछले वर्षों की कमियों को ध्यान में रखते हुए नवाचार के साथ काम किया गया है। बचा हुआ कार्य भी 10 दिन के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।”
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गोंडा17 मिनट पहले
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गोंडा जिले के कर्नलगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी की कटान से बचाव के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। बहुवनमदार माझा गांव के पास एल्गिन चरसड़ी तटबंध पर तीन नए स्पर (रक्षक संरचना) का निर्माण किया जा रहा है। पिछले साल इसी इलाके में घाघरा ने एक किलोमीटर तक कटान करते हुए तटबंध के करीब दस्तक दे दी थी, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल तबाह हो गई थी।
8.5 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे तीन स्पर
बाढ़ खंड विभाग द्वारा बनाए जा रहे इन तीनों स्परों की कुल लागत करीब 8.5 करोड़ रुपए है।
- पहला स्पर: 110 मीटर लंबा, लागत ₹2.78 करोड़
- दूसरा स्पर: 100 मीटर लंबा, लागत ₹2.95 करोड़
- तीसरा स्पर: 140 मीटर लंबा, लागत ₹2.12 करोड़
निर्माण कार्य 27 मार्च से शुरू हुआ था और इसे 29 जून तक पूरा करने की डेडलाइन दी गई है। फिलहाल 70% काम पूरा हो चुका है।
पॉलीमर जाली से मजबूत होगी रुकावट
इस बार स्परों के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। बोल्डर पिचिंग को पॉलीमर जाली के अंदर किया जा रहा है, जिससे स्पर ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होंगे। घाघरा के तेज बहाव को रोकने के लिए जाली के भीतर बोल्डर जमाए गए हैं, ताकि पानी की धार टकराकर दिशा बदल ले।
सख्त निगरानी, मशीनों के साथ मजदूर तैनात
बाढ़ खंड विभाग की ओर से काम की सतत निगरानी हो रही है। साइट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे प्रदेश स्तर तक मॉनिटरिंग हो रही है। पोकलैंड, जेसीबी जैसी भारी मशीनों के साथ मजदूरों की पूरी टीम दिन-रात काम में जुटी है।
पिछली बार बड़ी मुश्किल से बचा था तटबंध
पिछले साल घाघरा नदी की कटान से हालात गंभीर हो गए थे। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए एल्गिन चरसड़ी तटबंध को कटने से बचा लिया था, वरना दर्जनों गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाता। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पहले से तैयारी की जा रही है।
अधिकारी बोले- इस बार पहले से बेहतर काम
बाढ़ खंड विभाग के सहायक अभियंता पंकज आर्या ने बताया, “इस बार तीनों स्पर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाए जा रहे हैं। पिचिंग के लिए पॉलीमर जाली का उपयोग किया गया है। पिछले वर्षों की कमियों को ध्यान में रखते हुए नवाचार के साथ काम किया गया है। बचा हुआ कार्य भी 10 दिन के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।”
