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गाजियाबाद में रात में सर्द हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन: आज सुबह से प्रदूषण बढ़ने से फिर जहरीली हुई हवा – Ghaziabad News

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गाजियाबाद में रात में सर्द हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन:  आज सुबह से प्रदूषण बढ़ने से फिर जहरीली हुई हवा – Ghaziabad News

गाजियाबाद में रात में सर्द हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन: आज सुबह से प्रदूषण बढ़ने से फिर जहरीली हुई हवा – Ghaziabad News

गाजियाबाद में रात में सर्द हवाएं चलीं। जिससे गलन शुरू हो गई है। आज सोमवार सुबह तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। दिन में हल्की धूप खिलने के आसार हैं। जहां मौसम हल्का साफ रहेगा। आज से फिर प्रदूषण बढ़ा है। दिन में अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सि

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आज सुबह से फिर प्रदूषण बढ़ा

आज सुबह से फिर प्रदूषण बढ़ा है। जिससे फिर हवा जहरीली हुई है। यूपी में गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर के अलावा ग्रेटर नोएडा का AQI रेड जोन में पहुंच गया है। जबकि रविवार व शनिवार को प्रदूषण में राहत मिली थी। नवंबर माह में गाजियाबाद का एक्यूूआई 440 तक पहुंच गया था, जिससे लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगीं। आज जैसे ही AQI रेड जोन से यलो जाेन में आया तो दृश्यता भी बढ़ गई। शहर में डीजल से चलने वाले ऑटो और टेंपो पूरी तरह बंद हैं। बीएस-4 वाहनों पर भी पाबंदी जारी है। जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग सड़कों पर निगरानी बढ़ाए हुए हैं।

दिल्ली और यूपी में शहरों का AQI

शहर AQI
नोएडा 361
ग्रेटर नोएडा 357
हापुड़ 347
दिल्ली 336
गाजियाबाद 328
मुजफ्फरनगर 306
मेरठ 303
बुलंदशहर 285

प्रदूषण बढ़ने पर आंखों में जलन

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुमान अब एक्यूआई बढ़ने की अधिक संभावना नहीं है, यदि बढ़ता है तो ऐसे में सांस संबंधी रोगियों के लिए यह और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और अस्वस्थता जैसी समस्या हो सकती है।

गाजियाबाद के पल्मोनोलोजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने बचाव के लिए सभी को बाहरी गतिविधियों के दौरान N95 या डबल सर्जिकल मास्क पहनने की सलाह दी है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। वहीं, प्रशासन ने भी प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।

ये हैं शहरों में पॉल्यूशन के बड़े कारण

  • वायु प्रदूषण में पीएम-10 का 86 प्रतिशत उत्सर्जन सड़कों की धूल के कारण हो रहा है। 6% उत्सर्जन वाहनों से निकलने वाले धुएं से हो रहा है। निर्माण कार्य से 5% व इंडस्ट्री की भूमिका 3% है।
  • पीएम-2.5 में 72% हिस्सेदारी सड़कों के धूल की है। 20% वाहनों से हो रहा है। 6% उद्योगों व 3% निर्माण कार्यों के कारण यह हो रहा है।
  • वायु प्रदूषण के लिए दोषी सल्फर डाइऑक्साइड की सबसे अधिक 58% मात्रा उद्योगों से आ रही है। वाहनों से यह 21% आ रहा है। नाइट्रोजन आक्साइड का सबसे बड़ा कारक वाहन हैं।

प्रदूषण की वजह पराली जलानाउत्तर और मध्य भारत में दिवाली के बाद पराली जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस वजह से प्रदूषण बढ़ने की रफ्तार भी तेज होने लगती है। हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा पराली जलाई जाती है। 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पराली जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इससे किसानों को पराली का सफाया करने में परेशानी होने लगी।

केंद्र सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अधिनियम 2021 के तहत पराली जलाने पर नियम लागू किए। इसके मुताबिक 2 एकड़ से कम जमीन पर पराली जलाने पर 5,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। 2 से 5 एकड़ जमीन पर 10,000 रुपए और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर पराली जलाने पर 30,000 रुपए का जुर्माना लगता है।

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