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कोरोना में शादी रद्द करना मजबूरी थी, मनमर्जी नहीं: स्टेट कंज्यूमर कोर्ट ने कहा- बुकिंग कैंसिल पर उपभोक्ता को ब्याज सहित रिफंड दे मैरिज गार्डन संचालक – Jodhpur News

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कोरोना में शादी रद्द करना मजबूरी थी, मनमर्जी नहीं:  स्टेट कंज्यूमर कोर्ट ने कहा- बुकिंग कैंसिल पर उपभोक्ता को ब्याज सहित रिफंड दे मैरिज गार्डन संचालक – Jodhpur News

कोरोना में शादी रद्द करना मजबूरी थी, मनमर्जी नहीं: स्टेट कंज्यूमर कोर्ट ने कहा- बुकिंग कैंसिल पर उपभोक्ता को ब्याज सहित रिफंड दे मैरिज गार्डन संचालक – Jodhpur News

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की जोधपुर बेंच ने कहा- कोरोना महामारी के दौरान संक्रमण रोकने के लिए शादी रद्द करना उपभोक्ता की मजबूरी थी, मनमर्जी नहीं। आयोग ने जोधपुर श्री शनिचर जी का थान ट्रस्ट को निर्देश दिया कि वह परिवादी सुनीता शर्मा को 1 लाख

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हालांकि आयोग ने जीएसटी की रकम और जिला आयोग द्वारा लगाए गए हर्जाने को रिफंड के दायरे से बाहर रखा है। यह फैसला 30 दिसंबर 2025 को न्यायिक सदस्य निर्मल सिंह मेड़तवाल और सदस्य लियाकत अली की बेंच ने सुनाया। मामला कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण मैरिज गार्डन बुकिंग के बाद शादी टालने के विवाद का है।

दो बार टली शादी, फिर हुआ बुकिंग/रिफंड पर विवाद सरदारपुरा निवासी सुनीता शर्मा ने बेटी की शादी के लिए चौपासनी रोड स्थित श्री शनिचर जी का थान ट्रस्ट का नोहरा और हॉल बुक किया था। शुरुआत में शादी 17-18 मई 2020 को होनी थी। इसके लिए 18 फरवरी 2020 को 25 हजार रुपए का चेक एडवांस दिया था। लेकिन लॉकडाउन के कारण शादी टाल दी गई। इसके बाद ट्रस्ट की मांग पर 20 फरवरी 2020 को 1 लाख 18 हजार रुपए और जमा करवाए गए।

हालात सामान्य होने पर शादी की नई तारीख 1 और 2 मई 2021 तय की गई। लेकिन कोविड की दूसरी लहर और सरकारी गाइडलाइन को देखते हुए परिवार ने शादी रद्द कर दी। ट्रस्ट ने केवल 25 हजार रुपए लौटाए और बाकी राशि जब्त कर ली। इस पर सुनीता शर्मा ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया, जहां से उन्हें रिफंड का आदेश मिला था।

स्टेट कंज्यूमर कोर्ट ने कहा – कोरोनाकाल में शादी रद्द करने का फैसला सराहनीय। (इमेज सोर्स- AI जनरेटेड)

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ट्रस्ट की दलील: सरकार को जमा हो चुकी जीएसटी राज्य आयोग में अपील करते हुए ट्रस्ट की ओर से एडवोकेट हिमांशु सोलंकी ने तर्क दिया कि 1 और 2 मई 2021 को राज्य सरकार ने शादियों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया था।

  • वकील ने तर्क दिया कि परिवादिया ने 22 अप्रैल 2021 को शादी न करने की सूचना दे दी थी, जबकि सरकार की सख्त गाइडलाइन बाद में आई।
  • ट्रस्ट के वकील ने बताया कि बुकिंग फॉर्म की शर्तों के अनुसार राशि ‘नॉन-रिफंडेबल’ थी।
  • वकील ने स्पष्ट किया कि जमा राशि 1 लाख 18 हजार रुपए में से 18 हजार रुपए जीएसटी के थे, जो सरकारी खाते में जमा करवाए जा चुके हैं, इसलिए वह राशि नहीं लौटाई जा सकती।

उपभोक्ता का पक्ष: बारात गाजियाबाद से आनी थी परिवादिया की ओर से एडवोकेट महेंद्र पारीक ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की 29 अप्रैल 2021 की गाइडलाइन में शादियों में केवल 50 लोगों की अनुमति थी।

  • वकील ने बताया कि बारात गाजियाबाद (यूपी) से आनी थी और सभी मेहमानों का कोविड टेस्ट कराना या सुरक्षित रूप से आना संभव नहीं था।
  • वकील ने तर्क दिया कि 6 मई 2021 के सरकारी आदेश में मैरिज गार्डन्स को बुकिंग राशि लौटाने के स्पष्ट निर्देश थे, जिसे निरंतरता में देखा जाना चाहिए।

कोर्ट का फैसला: शादी न करना सराहनीय कदम दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य आयोग ने जिला आयोग के फैसले में संशोधन किया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा –

“परिवादिया द्वारा 1 मई 2021 और 2 मई 2021 को शादी नहीं किए जाने के कदम को सराहनीय कहा जा सकता है, क्योंकि यदि वे उस वक्त शादी करते तो अवश्य ही कोविड-19 को फैलाने में मदद ही करते।”

कोर्ट ने निर्देश दिया:

  • रिफंड की राशि: कोर्ट ने माना कि जीएसटी के 18 हजार रुपए की राशि सरकार को जमा हो चुकी है, इसलिए ट्रस्ट उसे लौटाने के लिए बाध्य नहीं है। ट्रस्ट को अब 1 लाख 18 हजार के बजाय 1 लाख रुपए लौटाने होंगे।
  • ब्याज: यह राशि परिवाद दायर करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ दो महीने में देनी होगी।
  • हर्जाना नहीं: कोर्ट ने जिला आयोग द्वारा लगाए गए 5 हजार रुपए के मानसिक हर्जाने को हटा दिया। कोर्ट ने कहा कि बुकिंग कैंसिल होने से ट्रस्ट को भी नुकसान हुआ है, इसलिए हर्जाना उचित नहीं है।

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