कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में संवेदनाएं ‘वेंटिलेटर’ पर: अव्यवस्था से और भी बढ़ जाती है तकलीफ, अस्पताल में मरीजों को ले जाने के लिए व्हीलचेयर-स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं – padrauna(Kushinagar) News h3>
प्रदीप यादव | पडरौना, कुशीनगर8 मिनट पहले
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में जहां स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी मूलभूत सुविधाएं तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए, वहां मरीजों के तीमारदारों को उन्हें कंधे या गोद में उठाकर डॉक्टर के पास ले जाना पड़ रहा है। हालत यह है कि स्ट्रेचर या व्हीलचेयर खोजने में घंटों लग जाते हैं, और इस देरी के चलते कई बार मरीज समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं।
हालांकि, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का दावा है कि अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, लेकिन सामने आई तस्वीरें जमीनी हकीकत बयां कर रही है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रविन्दर नगर धूस स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज का है।
स्ट्रेचर की तलाश में नहीं मिल पाते डॉक्टर
तीमारदारों का कहना है कि स्ट्रेचर की तलाश में इतना समय लग जाता है कि कई बार मरीज डॉक्टर से मिल ही नहीं पाते। ऐसे में डॉक्टर चेंबर छोड़कर चले जाते हैं और मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ता है। इससे तीमारदारों में आक्रोश है।
पिता को कंधे का सहारा देते छोटेलाल।
स्ट्रेचर की तलाश में नहीं हो पाया पिता का इलाज
तीमारदार छोटेलाल ने बताया कि वह राजकीय मेडिकल कॉलेज में अपने पिताजी का इलाज कराने आए थे। काफी देर तक उन्होंने स्ट्रेचर ढूंढा। स्ट्रेचर नहीं मिला और डॉक्टर चले गए। अगर समय पर स्ट्रेचर मिल गया होता तो वह आज अपने पिताजी का इलाज करवा लेते। स्ट्रेचर न मिलने की वजह से उन्होंने पिताजी को अपने कंधे का सहारा दिया।
तीमारदार सुनील।
मरीज को टांग कर अस्पताल बेड तक पहुंचाया
तीमारदार सुनील ने बताया कि अपनी मां का इलाज कराने के लिए अस्पताल लाए थे। स्ट्रेचर नहीं था तो टांग कर लाना पड़ा। काफी खोजने के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिला। वहीं, तीमारदार संजीत ने बताया कि करीब आधे घंटे से अस्पताल में स्ट्रेचर ढूंढते रहे, लेकिन नहीं मिला। आखिरकार उन्होंने मरीज को टांग कर अस्पताल बेड तक पहुंचाया, जहां इलाज जारी है।
प्राचार्य का दावा- पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर उपलब्ध
हालांकि, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके शाही का दावा है कि अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, लेकिन जमीनी हकीकत उनके दावे को झुठला रही है।
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प्रदीप यादव | पडरौना, कुशीनगर8 मिनट पहले
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में जहां स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी मूलभूत सुविधाएं तुरंत उपलब्ध होनी चाहिए, वहां मरीजों के तीमारदारों को उन्हें कंधे या गोद में उठाकर डॉक्टर के पास ले जाना पड़ रहा है। हालत यह है कि स्ट्रेचर या व्हीलचेयर खोजने में घंटों लग जाते हैं, और इस देरी के चलते कई बार मरीज समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं।
हालांकि, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का दावा है कि अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, लेकिन सामने आई तस्वीरें जमीनी हकीकत बयां कर रही है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रविन्दर नगर धूस स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज का है।
स्ट्रेचर की तलाश में नहीं मिल पाते डॉक्टर
तीमारदारों का कहना है कि स्ट्रेचर की तलाश में इतना समय लग जाता है कि कई बार मरीज डॉक्टर से मिल ही नहीं पाते। ऐसे में डॉक्टर चेंबर छोड़कर चले जाते हैं और मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ता है। इससे तीमारदारों में आक्रोश है।
पिता को कंधे का सहारा देते छोटेलाल।
स्ट्रेचर की तलाश में नहीं हो पाया पिता का इलाज
तीमारदार छोटेलाल ने बताया कि वह राजकीय मेडिकल कॉलेज में अपने पिताजी का इलाज कराने आए थे। काफी देर तक उन्होंने स्ट्रेचर ढूंढा। स्ट्रेचर नहीं मिला और डॉक्टर चले गए। अगर समय पर स्ट्रेचर मिल गया होता तो वह आज अपने पिताजी का इलाज करवा लेते। स्ट्रेचर न मिलने की वजह से उन्होंने पिताजी को अपने कंधे का सहारा दिया।
तीमारदार सुनील।
मरीज को टांग कर अस्पताल बेड तक पहुंचाया
तीमारदार सुनील ने बताया कि अपनी मां का इलाज कराने के लिए अस्पताल लाए थे। स्ट्रेचर नहीं था तो टांग कर लाना पड़ा। काफी खोजने के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिला। वहीं, तीमारदार संजीत ने बताया कि करीब आधे घंटे से अस्पताल में स्ट्रेचर ढूंढते रहे, लेकिन नहीं मिला। आखिरकार उन्होंने मरीज को टांग कर अस्पताल बेड तक पहुंचाया, जहां इलाज जारी है।
प्राचार्य का दावा- पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर उपलब्ध
हालांकि, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके शाही का दावा है कि अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, लेकिन जमीनी हकीकत उनके दावे को झुठला रही है।
