ओटी टेक्नीशियन ने पथरी का ऑपरेशन किया, किडनी गंवानी पड़ी: कुशीनगर में मरीज की जान खतरे में; आरोपी अस्पताल बंद कर फरार – Kushinagar News

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ओटी टेक्नीशियन ने पथरी का ऑपरेशन किया, किडनी गंवानी पड़ी:  कुशीनगर में मरीज की जान खतरे में; आरोपी अस्पताल बंद कर फरार – Kushinagar News

ओटी टेक्नीशियन ने पथरी का ऑपरेशन किया, किडनी गंवानी पड़ी: कुशीनगर में मरीज की जान खतरे में; आरोपी अस्पताल बंद कर फरार – Kushinagar News

अनूप कुमार यादव | कुशीनगर9 मिनट पहले

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कुशीनगर में पथरी का ऑपरेशन कराने गए युवक को अपनी एक किडनी गंवानी पड़ी है। OT टेक्नीशियन ने अपने दो साथियों के साथ ऑपरेशन किया। पथरी के गलत ऑपरेशन की वजह से युवक की किडनी में संक्रमण हो गया। फंसने के डर से टेक्नीशियन उसे लखनऊ के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गया, वहां किडनी निकलवा दी। यह बात उसने मरीज को भी नहीं बताई।

युवक को जब परेशानी हुई तो उसने जांच कराई। तब पता चला कि उसकी एक किडनी नहीं है। इस पर उसने पुलिस में शिकायत की है। ओटी टेक्नीशियन अस्पताल चलाता है। जिन दो साथियों के साथ उसने ऑपरेशन किया था, उनका काम मरीजों को तलाश कर अस्पताल पहुंचाना है।

शिकायत के बाद से आरोपी ओटी टेक्नीशियन अस्पताल पर ताला लगाकर फरार है। ‘दैनिक भास्कर’ टीम उस अस्पताल पर पहुंची, जहां ऑपरेशन हुआ था। मरीज, अस्पताल संचालक के बेटे, सीएमओ और एसपी समेत आसपास के लोगों से बात की, जो निकलकर आया वो काफी चौंकाने वाला है। पढ़िए रिपोर्ट…

कुशीनगर के इसी अस्पताल में युवक की पथरी का ऑपरेशन किया गया था।

अल्ट्रासाउंड में लेफ्ट किडनी में 17 एमएम की पथरी थी कुशीनगर जिला मुख्यालय से 26 किमी दूर नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक है। यहां उपाध्याय टोला के रहने वाले अलाउद्दीन (35) ने बताया, मार्च में उनके पेट में अचानक तेज दर्द उठा। पेन किलर खाने पर थोड़ी राहत मिल जाती। फिर दर्द शुरू हो जाता।

4 अप्रैल को मैंने पेट का अल्ट्रासाउंड कराया। तब पता चला कि लेफ्ट किडनी में 17 मिमी मीटर साइज की पथरी है। ऑपरेशन के बाद ही वह निकलेगी। मेरे घर से करीब ढाई किमी दूर कोटवा बाजार है। यहां न्यू लाइफ केयर अस्पताल है। अस्पताल के कर्मचारी तार मोहम्मद के कहने पर हमने अस्पताल संचालक इमामुद्दीन से सम्पर्क किया।

दावा- सर्जन बुलाकर ऑपरेशन किया जाएगा इमामुद्दीन ने पथरी के ऑपरेशन के लिए 40 हजार रुपए का खर्च बताया। यह भी दावा किया कि बाहर से सर्जन बुलाकर ऑपरेशन किया जाएगा। लेकिन जब 14 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया तो कोई सर्जन डॉक्टर नहीं आया। अस्पताल के संचालक इमामुद्दीन, तार मोहम्मद और अस्पताल के ही एक अन्य कर्मचारी ने मिलकर ऑपरेशन कर दिया। अलाउद्दीन ने 25 हजार रुपए दिए। बाकी बाद में देने के लिए कहा।

गुर्दे में इन्फेक्शन की बात पता चली अलाउद्दीन कहते हैं, ऑपरेशन के बाद एक सप्ताह अस्पताल में भर्ती रहा। लेकिन, घर आने के दो ही दिन में तबीयत फिर खराब हो गई। चंद कदम चलने पर सांस फूलने लगती है। शरीर काफी थका-थका महसूस कर रहा था।

इस पर परिजनों ने उसी अस्पताल में फिर भर्ती कराया और इलाज शुरू हुआ। तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो अस्पताल संचालक इमामुद्दीन ने पहले मुझे गोरखपुर ले जाकर भर्ती कराया। वहां गुर्दे में इन्फेक्शन की बात पता चली। गोरखपुर से लखनऊ रेफर कर दिया गया।

संचालक अस्पताल पर ताला लगाकर फरार हो गया है।

जून में फिर ऑपरेशन कराया गया अलाउद्दीन ने बताया, अस्पताल संचालक ने परिवार से बात की और लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराने के लिए राजी कर लिया। लोहिया अस्पताल में सात दिन बाद बेड मिला, तो जून में फिर ऑपरेशन कराया गया, क्योंकि किडनी का संक्रमण इतना बढ़ गया था कि कैंसर होने का खतरा था।

अलाउद्दीन का आरोप है कि उसे बिना बताए ही किडनी निकाल दी गई।

संचालक का बेटा बोला– पिता ओटी टेक्नीशियन एफआईआर होते ही न्यू लाइफ केयर अस्पताल का संचालक इमामुद्दीन फरार है। उसके बेटे रिजवान ने बताया, 2008 से उसका अस्पताल चल रहा है। पिता इमामुद्दीन ओटी टेक्नीशियन हैं। डॉ. सैमुल्लाह MBBS और MS हैं। अस्पताल पर डॉ. विवेक MBBS जनरल फिजिशियन हर वक्त मौजूद रहते हैं।

सीओ कर रहे जांच, अस्पताल ने रजिस्टर तक नहीं दिखाया अलाउद्दीन की शिकायत पर नेबुआ नौरंगिया थाने में अस्पताल संचालक अलाउद्दीन और तार मोहम्मद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसकी जांच सीओ बसन्त सिंह के नेतृत्व में थाने की टीम कर रही है।

CO बसन्त सिंह ने बताया, अस्पताल प्रबंधक अपना रजिस्टर तक नहीं दिखा रहा है।

एसपी संतोष मिश्रा ने बताया कि मामला गंभीर देखते हुए जांच शुरू कराई गई है। मुकदमा भी दर्ज हो गया है। सभी बिन्दुओं की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

सीएमओ के निर्देश पर अस्पताल पर नोटिस चिपकाया गया है।

सीएमओ को पता नहीं, अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है या नहीं कुशीनगर सीएमओ बृजनंदन सिंह ने बताया, जिले में जिन अस्पताल में सभी मानक पूरे किए जाते हैं, उन्हीं में ऑपरेशन हो सकता है। एक ऑपरेशन में सर्जन, एनसथीसिस्ट, ओटी टेक्नीशियन के साथ लैब, इमरजेंसी की व्यवस्था सभी होनी चाहिए। स्वास्थ विभाग की टीम मौके पर गई थी। अस्पताल बंद मिला। नोटिस लगाया गया है।

हालांकि जब दैनिक भास्कर ने उनसे सवाल किया कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन था, तो इस पर सीएमओ ने कहा कि पता नहीं। यानी एफआईआर के 24 घंटे बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम यह पता नहीं कर सकी कि अस्पताल वैध चल रहा था या अवैध।

आसपास के लोग बोले– संचालक खुद मरीज देखता था आसपास के लोग कैमरे पर खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है। ऑफ कैमरे वे बताते हैं कि अस्पताल 17 साल से चल रहा है। रोजाना करीब 20 से 25 पेशेंट अस्पताल में आते हैं, जिन्हें अस्पताल संचालक इमामुद्दीन खुद देखते थे।

मरीज पेंटर, बोला- परिवार कैसे पालूं, 4 लाख कर्ज हो चुका है मरीज अलाउद्दीन का कहना है कि वह एक दिहाड़ी मजदूर है। वह पेंटर का काम करके परिवार चलाता है। पांच सदस्यों के परिवार में उसकी एक बेटी 16 साल, बड़ा बेटा 12 साल और छोटा बेटा 10 साल के हैं। सभी पढ़ाई कर रहे, लेकिन इस अवैध अस्पताल और बिना डिग्री के डॉक्टरों ने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दिया। अगर पथरी का सही इलाज हो जाता तो किडनी में दिक्कत नहीं आई होती।

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