एसीबी की कार्रवाई: बेशर्मी… आरोपियों के परिजनों के पास पैसे नहीं थे, बकरा-मुर्गे उठा ले गई पुलिस – Udaipur News h3>
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की। एसीबी की इंटेलिजेंस यूनिट ने मांडवा थानाधिकारी निर्मल कुमार खत्री और कांस्टेबल भल्लाराम पटेल को 8 लाख रुपए की घूस लेते गिरफ्तार किया। दोनों एनडीपीएस के मामले में आरोपी नहीं बनाने के एवज में 4 लोगों से 20 लाख घूस मांग रहे थे। NEWS4SOCIALकी पड़ताल में सामने आया कि मांडवा पुलिस ने 20 मार्च को एनडीपीएस एक्ट की दो कार्रवाई की। मांडवा के साडीफलां निवासी मानीया गमेती और नदीफला निवासी नाथू गमेती के घर दबिश दी। मानीया के घर से 152.810 किलो और नाथू के घर से 128.390 किलो डोडा चूरा बरामद किया। इस दौरान मानीया और नाथू फरार थे। फिर थानाधिकारी निर्मल ने दोनों फरार आरोपियों के परिजन मोहना गमेती, कामा गमेती, हाकला गमेती और रमेशिया गमेती को मामले में आरोपी बनाने की धमकी दी। केस में नहीं फंसाने के बदले चारों से 5-5 लाख रुपए मांगे। राशि नहीं देने पर पुलिस उनके घरों से एक बकरा, मुर्गे और 7500 रुपए भी ले गई। फिर शनिवार को पुलिस ने सभी से 2-2 लाख यानी कुल 8 लाख लेना तय किया और राशि लेकर रविवार को कसारी गांव में बुलाया। घूस राशि में 7 लाख के डमी नोट थे
चारों परिवादियों के पास 8 लाख घूस देने की राशि नहीं थी। लेकिन, शिकायत का सत्यापन के दौरान रविवार को घूस देना तय हुआ। इस पर परिवादियों के एक लाख रुपए के साथ 7 लाख रुपए डमी नोट रखे गए। तब परिवादियों ने रविवार दोपहर को कसारी गांव में जाकर थानाधिकारी व कांस्टेबल को घूस दी। एसीबी दोनों आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में पेश करेगी। 281 किलो डोडा-चूरा पकड़ा, दो फरार आरोपियों के 4 परिजनों को आरोपी नहीं बनाने के बदले मांगे थे 20 लाख एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि इसी माह मांडवा थाने में एनडीपीएस एक्ट के अलग-अलग मामले दर्ज हुए। इनमें चार लोगों को आरोपी नहीं बनाने के बदले थानाधिकारी खत्री और कांस्टेबल पटेल ने 20 लाख रुपए की घूस की मांग की। चारों पीड़ितों को 5-5 लाख रुपए देने थे। फिर बातचीत के बाद थानाधिकारी 8 लाख रुपए लेने पर सहमत हुआ। इसकी सूचना एसीबी को मिली। टीम ने शनिवार को चारों परिवादियों से संपर्क किया। मामले की जानकारी लेने के बाद शिकायत दर्ज की। फिर शिकायत का सत्यापन किया। थानाधिकारी ने रविवार को चारों परिवादियों को 8 लाख रुपए लेकर पास के कसारी गांव में बुलाया। जहां दोपहर में एसीबी ने थानाधिकारी निर्मल कुमार और कांस्टेबल भल्लाराम को घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। NEWS4SOCIALइनसाइट- बेकरिया व कोटड़ा थाने के पास थी मामलों की जांच, सीआई आरोपी नहीं बना सकते थे खास बात यह है कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों की जांच दूसरे थाने के थानाधिकारी करते हैं। मामला दर्ज होने या आरोपियों के पकड़े जाने के बाद आगे की कार्रवाई दूसरा थानाधिकारी करता है। मांडवा थाने में मामले दर्ज होने के बाद जांच बेकरिया और कोटड़ा थाने को जांच सौंपी गई। इसके बाद भी मांडवा थानाधिकारी निर्मल चारों परिवादियों को झांसा देकर घूस मांग रहे थे। जबकि, घूस नहीं देने पर भी वह परिवादियों को आरोपी नहीं बना सकते थे।
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