एमबीए व एमसीए में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा के आवेदन आज से h3>
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आरा। निज प्रतिनिधि
वीर कुंवर सिंह सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए और एमसीए विभाग में सत्र 2024-26 में नामांकन अब प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए विवि ने तैयारी शुरू कर दी है। एडमिशन को ले विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन करेंगे। आगामी 13 से 23 जुलाई तक विद्यार्थी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करेंगे। एडमिशन को ले इस बार विज्ञापन भी जारी किया गया है। एमबीए में दाखिले को ले वैसे विद्यार्थी, जिन्होंने पूर्व में ऑफलाइन आवेदन जमा किया है वे भी ऑनलाइन आवेदन करेंगे। हालांकि वे ऑनलाइन फॉर्म का शुल्क जमा नहीं करेंगे। बता दें कि पूर्व में दोनों विभाग अपने हिसाब से एडमिशन नहीं लेते आ रहे थे। विभाग स्तर से एडमिशन लिए जाने और उसमें नियमों का पालन नहीं होने की शिकायत विवि को की गयी थी। इस पर कुलपति प्रो शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने संज्ञान लिया और नियम-परिनियम के तहत परीक्षा लेने का आदेश जारी किया। वीसी ने एडमिशन के लिए विज्ञापन भी प्रकाशित करने का निर्देश दिया, ताकि सभी जगह के विद्यार्थी दाखिले को ले आवेदन कर सकें। इसके बाद परीक्षा विभाग की ओर से विज्ञापन जारी किया गया है। मालूम हो कि दाखिले को ले किसी अखबार में कोई विज्ञापन जारी नहीं होने पर पूर्व सीनेटर अजय कुमार तिवारी मुनमुन ने सवाल खड़ा किया था। साथ ही प्रवेश परीक्षा के आधार पर एडमिशन लेने की मांग कुलपति से की थी। बता दें कि एमबीए में नामांकन के लिए 60 सीटें हैं, जबकि एमसीए में 45 सीटें हैं।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र से एमसीए कोर्स अब दो वर्ष का
आरा। कंप्यूटर एप्लिकेशन में मास्टर डिग्री की चाह रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में संचालित एमसीए (मास्टर इन कंप्यूटर एप्लिकेशन ) पाठ्यक्रम अब दो वर्ष का हो गया है। शैक्षणिक सत्र 2024-26 से यह लागू हो गया है। वर्तमान सत्र में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एमसीए में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को दो वर्ष में ही डिग्री मिलेगी। मालूम हो कि एआईसीटीई के दिशा निर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम की समयावधि में यह बदलाव किया गया है। इससे संबंधित निर्देश पिछले वर्ष ही विवि को जारी किया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से गत सत्र में लागू नहीं हो सका। यूजीसी ने भी विवि को पत्र जारी कर दो वर्ष पाठ्यक्रम संचालित करने की बात कहीं थी। मालूम हो कि दो वर्षीय पाठ्यक्रम को ले प्रस्ताव सरकार स्तर पर लंबित था। इस कारण दाखिले में विलंब हो रहा था। कुलपति की पहल पर दो वर्षीय पाठ्यक्रम संबंधित अड़चनें दूर हुई हैं।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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वीर कुंवर सिंह सिंह विश्वविद्यालय के एमबीए और एमसीए विभाग में सत्र 2024-26 में नामांकन अब प्रवेश परीक्षा के आधार पर होगा। प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए विवि ने तैयारी शुरू कर दी है। एडमिशन को ले विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन करेंगे। आगामी 13 से 23 जुलाई तक विद्यार्थी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करेंगे। एडमिशन को ले इस बार विज्ञापन भी जारी किया गया है। एमबीए में दाखिले को ले वैसे विद्यार्थी, जिन्होंने पूर्व में ऑफलाइन आवेदन जमा किया है वे भी ऑनलाइन आवेदन करेंगे। हालांकि वे ऑनलाइन फॉर्म का शुल्क जमा नहीं करेंगे। बता दें कि पूर्व में दोनों विभाग अपने हिसाब से एडमिशन नहीं लेते आ रहे थे। विभाग स्तर से एडमिशन लिए जाने और उसमें नियमों का पालन नहीं होने की शिकायत विवि को की गयी थी। इस पर कुलपति प्रो शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने संज्ञान लिया और नियम-परिनियम के तहत परीक्षा लेने का आदेश जारी किया। वीसी ने एडमिशन के लिए विज्ञापन भी प्रकाशित करने का निर्देश दिया, ताकि सभी जगह के विद्यार्थी दाखिले को ले आवेदन कर सकें। इसके बाद परीक्षा विभाग की ओर से विज्ञापन जारी किया गया है। मालूम हो कि दाखिले को ले किसी अखबार में कोई विज्ञापन जारी नहीं होने पर पूर्व सीनेटर अजय कुमार तिवारी मुनमुन ने सवाल खड़ा किया था। साथ ही प्रवेश परीक्षा के आधार पर एडमिशन लेने की मांग कुलपति से की थी। बता दें कि एमबीए में नामांकन के लिए 60 सीटें हैं, जबकि एमसीए में 45 सीटें हैं।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र से एमसीए कोर्स अब दो वर्ष का
आरा। कंप्यूटर एप्लिकेशन में मास्टर डिग्री की चाह रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में संचालित एमसीए (मास्टर इन कंप्यूटर एप्लिकेशन ) पाठ्यक्रम अब दो वर्ष का हो गया है। शैक्षणिक सत्र 2024-26 से यह लागू हो गया है। वर्तमान सत्र में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एमसीए में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को दो वर्ष में ही डिग्री मिलेगी। मालूम हो कि एआईसीटीई के दिशा निर्देशों के अनुसार पाठ्यक्रम की समयावधि में यह बदलाव किया गया है। इससे संबंधित निर्देश पिछले वर्ष ही विवि को जारी किया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से गत सत्र में लागू नहीं हो सका। यूजीसी ने भी विवि को पत्र जारी कर दो वर्ष पाठ्यक्रम संचालित करने की बात कहीं थी। मालूम हो कि दो वर्षीय पाठ्यक्रम को ले प्रस्ताव सरकार स्तर पर लंबित था। इस कारण दाखिले में विलंब हो रहा था। कुलपति की पहल पर दो वर्षीय पाठ्यक्रम संबंधित अड़चनें दूर हुई हैं।
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