उदयपुर की श्रीनाथजी हवेली में अलौकिक मनोरथ: चंदन की पत्तियों और कलियों के हिंडोले में झूले ठाकुरजी, दर्शनों के लिए उमड़े श्रद्धालु – Udaipur News h3>
उदयपुर में शहर के बीचोबीच स्थित श्रीनाथजी की हवेली में रविवार देर रात को बेहद अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिला। यहां ‘आज वन झूलत मदनगोपाल’ के विशेष धार्मिक भाव के साथ एक बड़े मनोरथ (धार्मिक आयोजन) का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर ठाकुरजी को मंदिर परिसर के बाहर बनी सुंदर अनुराधा वाटिका में लाया गया। चारों तरफ फैली हरियाली के बीच सुवासित चंदन की पत्तियों, कली और रंग-बिरंगे फूलों से एक बेहद खूबसूरत हिंडोला (झूला) तैयार किया गया था। इस मनमोहक हिंडोले में श्री मदन मोहनलाल प्रभु को विराजमान किया गया। उन्हें कलियों का बेहद सुंदर और विशेष श्रृंगार धराया गया था। विशाल बावा ने झुलाया हिंडोला और उतारी आरती
वल्लभ कुल के युवराज विशाल बावा ने खुद इस अलौकिक हिंडोले में ठाकुरजी को पूरे लाड-चाव से झुलाया। इसके साथ ही, मुख्य मंदिर (निज मंदिर) के भीतर श्रीजी प्रभु को भी कलियों का विशेष श्रृंगार धारण कराया गया। इस दौरान विशाल बावा ने मदन मोहनलाल प्रभु और श्रीजी प्रभु की भव्य आरती उतारी। इस अद्भुत झांकी के दर्शन पाकर वहां मौजूद सैकड़ों भक्त भाव-विभोर हो उठे। दर्शन करने के बाद सभी भक्तों ने युवराज श्री विशाल बावा के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। इस बड़े धार्मिक उत्सव को लेकर मंदिर में पिछले कई दिनों से जोर-शोर से तैयारियां चल रही थीं। इन लोगों ने संभाली पूरी व्यवस्था
मंदिर के सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य ने बताया कि इस विशेष मनोरथ को सफल बनाने में मंदिर के कर्मचारियों, सेवादारों और आम भक्तों ने दिन-रात एक कर दिया। आयोजन की मुख्य व्यवस्थाओं में सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य के साथ भंडारी रामचंद्र सनाढ्य, दिलखुश दवे, छोगालाल वारी और वैष्णव सेवा समिति के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर अपनी सेवाएं दीं। हवेली में आने वाले दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देखते हुए एंट्री और एक्जिट (आने-जाने) के लिए एक खास रूट बनाया गया था। भक्तों को सबसे पहले पार्किंग वाले गेट से मंदिर के भीतर प्रवेश दिया गया। यहां से आगे बढ़ते हुए श्रद्धालु गिरिराज जी मंदिर पहुंचे। इसके बाद कमल चौक और गोवर्धन पूजा चौक से होते हुए भक्तों ने अनुराधा वाटिका में प्रवेश किया, जहां ठाकुरजी हिंडोले में विराजमान थे। दर्शन करने के बाद सभी लोग लाल दरवाजे के रास्ते से होते हुए आराम से बाहर निकल गए। इस सुचारू व्यवस्था की वजह से कहीं भी धक्का-मुक्की नहीं हुई और लोगों ने शांति से दर्शन किए। शयन के दर्शन पूरे होने के बाद, श्री विशाल बावा ने वैष्णव भक्तों और आम दर्शनार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक नए कदम की शुरुआत की। मंदिर के जिस द्वार का जीर्णोद्धार (मरम्मत और नया निर्माण) किया गया था, उसका उन्होंने पूरे विधि-विधान से डेली पूजन और मार्जन किया। इस खास और बड़े धार्मिक प्रसंग के मौके पर श्रीनाथजी मंदिर के अधिकारी सुधाकर उपाध्याय, मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास, मंदिर मंडल के सीईओ जितेंद्र पांडे और तिलकायत के सचिव लीलाधर पुरोहित मुख्य रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा श्रीनाथजी मंदिर के पंड्या जी परेश नागर, मीडिया प्रभारी व पीआरओ गिरीश व्यास, कैलाश पुरोहित, रामचंद्र सनाढ्य, कैलाश पालीवाल, नितिन पानेरी, ध्रुमिल भाई, देवेश सांचीहर और अल्पेश पारिख सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
राजस्थान की और समाचार देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – RajasthanNews