इंदौर में कर्मचारियों ने रोका कुलगुरु का रास्ता: कार से उतरकर पैदल कैंपस से बाहर निकले; रोड किनारे फुटपाथ पर बैठकर किया इंतजार – Indore News h3>
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के तक्षशिला परिसर में एक चौकाने वाला वाकया शनिवार को हुआ। अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय स्ववित्त संस्थान कर्मचारी (गैर शिक्षक) संघ के अधिकारी-कर्मचारियों ने कुलगुरु डॉ.राकेश सिंघई की कार को रोक द
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दरअसल, ये वाकया शनिवार को खंडवा रोड स्थित तक्षशिला परिसर का है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय स्ववित्त संस्थान कर्मचारी (गैर शिक्षक) संघ अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 16 दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। आज हड़ताल का 17वां दिन था। शनिवार को जब कुलगुरु डॉ.राकेश सिंघई तक्षशिला परिसर में एक प्रोग्राम से लौट रहे थे। तभी कर्मचारियों ने कुलगुरु की कार को रोक लिया। वे उनकी कार के सामने खड़े हो गए और जमकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद वे उनकी कार से सामने बैठकर नारेबाजी करने लगे।
कार से उतरकर पैदल बाहर निकले, गेट बंद कर की रोकने की कोशिश
काफी देर बाद भी जब कर्मचारी कार के सामने से नहीं हटे और बात करने नहीं आए तो कुलगुरु खुद अपने कार से उतर गए और पैदल ही कैंपस के बाहर जाने लगे। इस बीच एक व्यक्ति ने कुलगुरु को बाहर जाने से रोकते हुए उनके सामने ही कैंपस का मेन गेट बंद कर दिया, लेकिन कुलगुरु ने खुद गेट खोला और कैंपस से बाहर चले गए। कैंपस से बाहर निकलकर वे रोड पर आए और वहां से आगे जाने लगे। मगर कर्मचारी उनके जाने के दौरान भी नारेबाजी करते हुए कैंपस के मेन गेट तक आ गए।
तस्वीरों में देखिए पूरा वाकया –
तक्षशिला परिसर में मेन गेट के पास कर्मचारियों ने कुलगुरु की गाड़ी को रोका। रोड पर बैठकर कर्मचारी नारेबाजी करने लगे।
कर्मचारियों ने कुलगुरु की गाड़ी का रास्ता रोका। इस बीच कुलगुरु कुछ देर कार में बैठे रहे।
कर्मचारी कार से सामने से नहीं हटे, ना ही बात करने आगे आए तो कुलगुरु खुद कार से उतर गए।
कुलगुरु पैदल बाहर जाने लगे तो एक व्यक्ति ने मेन गेट बंद कर दिया। कुलगुरु खुद गेट खोलकर बाहर रोड पर चले गए।
इसके बाद कुलगुरु रोड पर पैदल ही कैंपस से दूर जाने लगे।
तक्षशिला कैंपस से पैदल बाहर रोड किनारे जाते हुए कुलगुरु।
कुलगुरु की कार को भी बाहर जाने से रोकने का प्रयास किया गया।
इसके बाद कुलगुरु कैंपस से थोड़ा दूर जाकर फुटपाथ पर रोड किनारे बैठ गए। इसके बाद जब उनकी कार बाहर आई तब वह कार में बैठकर रवाना हुए।
आगे जाकर रोड किनारे बैठे कुलगुरु
इधर, कुलगुरु पैदल ही कैंपस से थोड़ा आगे जाकर रोड किनारे बैठ गए और वहां पर कॉल पर किसी से चर्चा करने लगे। इस बीच जब कुलगुरु के ड्राइवर ने उनकी कार को कैंपस से बाहर निकालने का प्रयास किया तो कर्मचारियों ने कार को भी रोकने की कोशिश की, लेकिन बाद में कार को बाहर जाने दिया। जिसके बाद ड्राइवर कार लेकर कुलगुरु के पास पहुंचा, तब कहीं जाकर वे कार में बैठकर रवाना हुए। इस पूरे घटनाक्रम का कई लोगों ने वीडियो भी बनाया।
कुलगुरु बोले – कोई गीला शिकवा नहीं
इस मामले में जब कुलगुरु डॉ.राकेश सिंघई से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कर्मचारियों ने जो हरकत की उसे लेकर कोई गीला शिकवा नहीं है। शनिवार को तक्षशिला परिसर से लौटते वक्त रोकने की कोशिश की। मैं उन्हें सम्मान देता हूं, गाड़ी वहीं छोड़कर उतर कर बाहर आ गया। बाहर सड़क किनारे जाकर फुटपाथ पर बैठ गया, जब गाड़ी आई तो उसमें बैठकर चला गए। एक्शन लेने का कोई प्रश्न नहीं है? क्योंकि वह हमारे ही कर्मचारी है। उनकी कुछ मांगें है। इसे लेकर मैं खुद एक बार उनके बीच जा चुका हूं। उनसे बात की, सारे पाइंट डिस्कस भी किए, पर वे नहीं माने। एक बार कुलसचिव भी उनसे मिलने जा चुके हैं। उन्हें पत्र लिखकर मिलने भी बुलाया, लेकिन वे नहीं आए।
बाहरी तत्वों का हाथ
कुलगुरु डॉ. सिंघई ने बताया कि इनके पूरे आंदोलन के पीछे बाहरी तत्वों का हाथ है। उनके द्वारा इनकी फंडिंग की जा रही है। कर्मचारियों को भोजन करवाया जा रहा है, चाय-नाश्ता भी करवाया जा रहा है। टेंट का खर्च भी बाहरी तत्वों द्वारा दिया गया है।
एक व्यक्ति को इसमें हमेशा बैठे रहते हैं। उनका विश्वविद्यालय से कोई लेना-देना नहीं है। उनके मार्गदर्शन में ये सब चल रहा है। हमने ये जाना है कि बाहरी तत्वों से मिलकर इस आंदोलन को बनाया जा रहा है। हमने कर्मचारियों को बुलाया, लेकिन वे मिलने नहीं आए है। कुलगुरु ने कहा कि जो भी संगत मांग होगी। वह पूर्ण होगी। इस घटना को लेकर अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने इसकी निंदा भी की।
