आसमानी ठनका से मौत पर लगेगा विराम? 40 मिनट पहले बजेगा हूटर, जानें कैसे काम करती है मशीन h3>
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बिहार में ठनका यानि आसमानी बिजली या वज्रपात गिरने की घटनाओं का हर साल इजाफा हो रहा है। इस साल वज्रपात की चपेट में आकर सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले साल रिकॉर्ड काफी लोगों की मौत वज्रपात से हुई थी। बीते 24 घंटों में बिहार के विभिन्न जिलों में 25 लोगों की मौत आसमानी कहर की चपेट में आने से हो गई। इसके बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने कई अहम निर्णय लिये हैं। ऐसे में जिले की सभी पंचायतों में वज्रपात की पूर्व जानकारी देने वाली मशीनें लगायी जाएंगी। इसके कारण ठनका गिरने से 40 मिनट पहले ही हूटर बजेगा। शुरुआत नालंदा से किया गया है। जिले को वज्रपात मामले में अति संवेदनशील घोषित किया गया है।
हूटर मशीनें स्थापित करने के लिए नालंदा में जिला स्तर से विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। हूटर बजने की आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई देगी। इससे लोग अलर्ट हो जायेंगे। आपदा प्रबंधन एडीएम मो. शफीक ने बताया कि ठनका से होने वाली जान-माल की क्षति को कम करने के लिए विभाग अलर्ट है। ठनका से बचाव के लिए जिले में हूटर स्थापित किये जाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा जायेगा। हूटर स्थापित होने से ठनका गिरने से होने वाली जान-माल की क्षति कुछ हद तक कमी आएगी। जिले की हर पंचायत में एक-एक हूटर लगाये जाने का प्रस्ताव तैयार किया जायेगा। इसके साथ ही, पूरे जिले में सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर पंचायत में बचाव के बैनर-पोस्टर लगाये जायेंगे। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पंपलेट वितरित किये जाएंगे। कृषि से संबंधित दुकानों पर भी किसानों को जागरूक करने के लिए पंपलेट व जागरूकता रथ निला जाएगा।
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कैसे काम करता है हूटर
हूटर एक तरह की मशीन है, जिसे स्थापित किया जाता है। आसमानी बिजली गिरने के 30-40 मिनट पहले अलर्ट हूटर आवाज देना शुरू कर देता है। हूटर की आवाज तीन से चार किलोमीटर के दायरे तक सुनाई देती है। गांवों के खेतों में काम करने वाले किसान या खुले में रहने लोग इस हूटर की आवाज को सुनकर सचेत हो सकेंगे। लोग बड़ी आसानी से खेत-खंधों से अपने घरों में वापस लौट सकते हैं या एहतियातन बचाव के कदम उठा सकते हैं।
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ठनका प्रभावित क्षेत्र में नालंदा भी शामिल
ठनका गिरने के डेंजर जोन में सीमाचल, कोसी के क्षेत्रों को माना जाता है। नालंदा अभी डेंजर जोन में तो नहीं पहुंचा, लेकिन बढ़ती घटनाएं विभाग को चितिंत कर रहा है। नालंदा में ठनका गिरने की घटनाओं को देखते हुए अलर्ट मोड में रहने का आदेश दिया गया है। वर्ष 2023 में ठनका गिरने से छह व्यक्ति की मौत हो गयी थी, जबकि एक मवेशी की भी जान चली गयी थी। साथ ही, एक व्यक्ति घायल हो गया था। आधिकारिक तौर पर 2024 में भी ठनका गिरने से एक व्यक्ति की मौत अब तक हो चुकी है। हालांकि, पीड़ित परिजनों को जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित मुआवजा का भी भुगतान किया जा चुका है।
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बिहार में ठनका यानि आसमानी बिजली या वज्रपात गिरने की घटनाओं का हर साल इजाफा हो रहा है। इस साल वज्रपात की चपेट में आकर सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पिछले साल रिकॉर्ड काफी लोगों की मौत वज्रपात से हुई थी। बीते 24 घंटों में बिहार के विभिन्न जिलों में 25 लोगों की मौत आसमानी कहर की चपेट में आने से हो गई। इसके बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने कई अहम निर्णय लिये हैं। ऐसे में जिले की सभी पंचायतों में वज्रपात की पूर्व जानकारी देने वाली मशीनें लगायी जाएंगी। इसके कारण ठनका गिरने से 40 मिनट पहले ही हूटर बजेगा। शुरुआत नालंदा से किया गया है। जिले को वज्रपात मामले में अति संवेदनशील घोषित किया गया है।
हूटर मशीनें स्थापित करने के लिए नालंदा में जिला स्तर से विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। हूटर बजने की आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई देगी। इससे लोग अलर्ट हो जायेंगे। आपदा प्रबंधन एडीएम मो. शफीक ने बताया कि ठनका से होने वाली जान-माल की क्षति को कम करने के लिए विभाग अलर्ट है। ठनका से बचाव के लिए जिले में हूटर स्थापित किये जाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा जायेगा। हूटर स्थापित होने से ठनका गिरने से होने वाली जान-माल की क्षति कुछ हद तक कमी आएगी। जिले की हर पंचायत में एक-एक हूटर लगाये जाने का प्रस्ताव तैयार किया जायेगा। इसके साथ ही, पूरे जिले में सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर पंचायत में बचाव के बैनर-पोस्टर लगाये जायेंगे। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पंपलेट वितरित किये जाएंगे। कृषि से संबंधित दुकानों पर भी किसानों को जागरूक करने के लिए पंपलेट व जागरूकता रथ निला जाएगा।
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हूटर एक तरह की मशीन है, जिसे स्थापित किया जाता है। आसमानी बिजली गिरने के 30-40 मिनट पहले अलर्ट हूटर आवाज देना शुरू कर देता है। हूटर की आवाज तीन से चार किलोमीटर के दायरे तक सुनाई देती है। गांवों के खेतों में काम करने वाले किसान या खुले में रहने लोग इस हूटर की आवाज को सुनकर सचेत हो सकेंगे। लोग बड़ी आसानी से खेत-खंधों से अपने घरों में वापस लौट सकते हैं या एहतियातन बचाव के कदम उठा सकते हैं।
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