आशीष ने कहा- 4 साल से बेटियों को नहीं देखा: SC ने एक दिन लखीमपुर जाने की दी अनुमति, वकील का दावा 10 दिन का मिले समय – Lakhimpur-Kheri News h3>
गोपाल गिरी | लखीमपुर-खीरी20 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी केस के आरोपी आशीष मिश्रा को जमानत की शर्त में रियायत दी है। आशीष को हर हफ्ते 1 दिन के लिए लखीमपुर में अपने परिवार के साथ रहने की अनुमति मिल गई है। कोर्ट के आदेश के चलते लखनऊ में रह रहा आशीष हर शनिवार शाम लखीमपुर पहुंच कर रविवार शाम तक वहां रह सकेगा।
अदालत ने यह भी कहा कि इस दौरान आशीष मिश्रा किसी सार्वजनिक मीटिंग में भाग नहीं लेगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होगा।
आशीष मिश्रा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि वह अपनी मां और बच्चों से मिल नहीं पाता है। साथ ही वह अपने बच्चों और परिवार के साथ समय बिताना चाहता है। अपनी मां और बेटियों से पिछले 4 साल से नहीं मिला हूं। मेरी मां की तबीयत भी ठीक नहीं है।
आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उन्होंने चार साल से अपनी बेटियों को नहीं देखा है।
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चार साल से अपनी बेटियों को नहीं देखा आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उन्होंने चार साल से अपनी बेटियों को नहीं देखा है। इसलिए उन्हें हर महीने कम से कम 10 दिन अपने परिवार के साथ समय बिताने की परमीशन मिलनी चाहिए।
आशीष मिश्रा के वकील ने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष के जो आरोपी हैं, उनकी जमानत की शर्तों में ऐसा कुछ नहीं है, जबकि वे जमानत के बाद भी लखीमपुर में रह रहे हैं। वहीं आशीष की मां की तबीयत ठीक होने का हवाला भी दिया।
केवल परिवार के साथ रहे, राजनीतिक गतिविधि न करें आशीष मिश्रा ने अपनी मां और बेटियों से पिछले 4 साल से दूर रहने का हवाला देते हुए राहत मांगी थी। कोर्ट ने उसे रियायत देते हुए शर्त रखी है कि वह इस दौरान परिवार के साथ रहे। कोई राजनीतिक गतिविधि न करे। गवाहों और समर्थकों से मुलाकात न करें।
सुनवाई में यूपी सरकार की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने पेश हुईं। उन्होंने बताया कि कुल 208 गवाहों में से 16 की गवाही पूरी हो चुकी है, जिनमें से 10 ऐसे हैं, जो आशीष की गाड़ी से घायल हुए थे।
मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है।
अब जानिए क्या था मामला 3 अक्टूबर, 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आंदोलनकारी किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना हुई थी। इस घटना में और उसके बाद उग्र किसानों की तरफ से की गई आरोपियों की पिटाई में कुल 8 लोगों की जान गई थी। मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है।
10 फरवरी, 2022 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आशीष को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। 18 अप्रैल, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया था। उसके बाद वह जेल में रहा. 25 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ उसकी रिहाई का आदेश दिया। जुलाई, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदल दिया था। कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह दिल्ली या लखनऊ में रहे। कोर्ट ने कहा था कि जब मुकदमे में पेशी हो, तो वह लखीमपुर जा सकता है।
लखीमपुर के तिकुनिया कांड का ये है पूरा घटनाक्रम
ये तस्वीर 3 अक्टूबर 2021 की है। लखीमपुर के तिकुनिया में किसानों की गाड़ियों से कुचलकर मौत हो गई थी। इस मामले में आशीष पर हत्या का केस चल रहा है।
- 3 अक्टूबर को खीरी हिंसा कांड में एक पत्रकार, चार किसान व तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी।
- 4 अक्टूबर को खीरी हिंसा मामले में केंद्रीय राज्यमंत्री के पुत्र आशीष मिश्र व 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ थाना तिकुनिया में मुकदमा दर्ज किया गया था।
- 4 अक्टूबर को ही खीरी हिंसा मामले में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या व आगजनी के आरोप में 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ दूसरा मुकदमा दर्ज।
- 8 अक्टूबर को पुलिस ने नोटिस देकर बयान के लिए आशीष मिश्र को बुलाया, लेकिन बीमारी के चलते पेश नहीं हुआ।
- 9 अक्टूबर को आशीष मिश्रा अपने अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह के साथ पुलिस लाइन पहुंचा। 12 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद उसे हिरासत में लिया गया। इसके बाद रात को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और जेल भेज दिया गया।
- 11 अक्टूबर को पुलिस कस्टडी रिमांड पर सुनवाई हुई थी।
- 12 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक आशीष की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर।
- 14 अक्टूबर को आशीष मिश्रा को घटनास्थल पर ले जाया गया और रीक्रिएशन कराया गया था।
- 14 अक्टूबर को सीजेएम कोर्ट से आशीष की जमानत अर्जी खारिज हुई थी।
- 21 अक्टूबर को दोबारा पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दी गई थी।
- 22 अक्टूबर को 48 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर हो गई थी।
- 28 अक्टूबर को आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई जिला जज की अदालत में होनी थी। अभियोजन ने स्थगन अर्जी दी, तीन नवंबर नीयत
- 3 नवंबर को शोक प्रस्ताव के चलते जमानत अर्जी पर सुनवाई टली, 15 नवंबर नीयत की गई थी।
- 15 नवंबर को आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी जिला जज मुकेश मिश्रा ने खारिज कर दी थी।
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अदालत ने यह भी कहा कि इस दौरान आशीष मिश्रा किसी सार्वजनिक मीटिंग में भाग नहीं लेगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होगा।
आशीष मिश्रा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि वह अपनी मां और बच्चों से मिल नहीं पाता है। साथ ही वह अपने बच्चों और परिवार के साथ समय बिताना चाहता है। अपनी मां और बेटियों से पिछले 4 साल से नहीं मिला हूं। मेरी मां की तबीयत भी ठीक नहीं है।
आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उन्होंने चार साल से अपनी बेटियों को नहीं देखा है।
चार साल से अपनी बेटियों को नहीं देखा आशीष मिश्रा के वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उन्होंने चार साल से अपनी बेटियों को नहीं देखा है। इसलिए उन्हें हर महीने कम से कम 10 दिन अपने परिवार के साथ समय बिताने की परमीशन मिलनी चाहिए।
आशीष मिश्रा के वकील ने आरोप लगाया कि दूसरे पक्ष के जो आरोपी हैं, उनकी जमानत की शर्तों में ऐसा कुछ नहीं है, जबकि वे जमानत के बाद भी लखीमपुर में रह रहे हैं। वहीं आशीष की मां की तबीयत ठीक होने का हवाला भी दिया।
केवल परिवार के साथ रहे, राजनीतिक गतिविधि न करें आशीष मिश्रा ने अपनी मां और बेटियों से पिछले 4 साल से दूर रहने का हवाला देते हुए राहत मांगी थी। कोर्ट ने उसे रियायत देते हुए शर्त रखी है कि वह इस दौरान परिवार के साथ रहे। कोई राजनीतिक गतिविधि न करे। गवाहों और समर्थकों से मुलाकात न करें।
सुनवाई में यूपी सरकार की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने पेश हुईं। उन्होंने बताया कि कुल 208 गवाहों में से 16 की गवाही पूरी हो चुकी है, जिनमें से 10 ऐसे हैं, जो आशीष की गाड़ी से घायल हुए थे।
मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है।
अब जानिए क्या था मामला 3 अक्टूबर, 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आंदोलनकारी किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाए जाने की घटना हुई थी। इस घटना में और उसके बाद उग्र किसानों की तरफ से की गई आरोपियों की पिटाई में कुल 8 लोगों की जान गई थी। मामले का मुख्य आरोपी तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बेटा आशीष मिश्रा उर्फ मोनू है।
10 फरवरी, 2022 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आशीष को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। 18 अप्रैल, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया था। उसके बाद वह जेल में रहा. 25 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ उसकी रिहाई का आदेश दिया। जुलाई, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की अंतरिम जमानत को नियमित जमानत में बदल दिया था। कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह दिल्ली या लखनऊ में रहे। कोर्ट ने कहा था कि जब मुकदमे में पेशी हो, तो वह लखीमपुर जा सकता है।
लखीमपुर के तिकुनिया कांड का ये है पूरा घटनाक्रम
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- 14 अक्टूबर को सीजेएम कोर्ट से आशीष की जमानत अर्जी खारिज हुई थी।
- 21 अक्टूबर को दोबारा पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दी गई थी।
- 22 अक्टूबर को 48 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर हो गई थी।
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- 3 नवंबर को शोक प्रस्ताव के चलते जमानत अर्जी पर सुनवाई टली, 15 नवंबर नीयत की गई थी।
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