आज शिव योग में मनाई जाएगी नाग पंचमी: सर्पों के 12 स्वरूपों की होगी पूजा, कालसर्प दोष से मिलेगा छुटकारा – Patna News h3>
आज नाग पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। सावन महीने में श्रृद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती के साथ नाग को भी जल चढ़ाएंगे।
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आज उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में शिव योग के साथ रवियोग का सुयोग बन रहा है। नाग देवता की पूजा करने से जातक को कालसर्प दोष से मुक्ति मिलेगी।
नाग देवता की दूध, दही, लावा, दुर्बा, पुष्प और सिंदूर से विधिवत पूजा होगी।
सर्पों के 12 स्वरूपों की होती पूजा
आचार्य राकेश झा ने बताया कि भविष्य पुराण के अनुसार सावन महीने की पंचमी तिथि नाग देवता को समर्पित है। इसलिए इसे नागपंचमी कहा जाता है।
इस दिन सर्पों के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसमें अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, कर्कोटक, अश्व, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया तथा तक्षक प्रमुख हैं।
भगवान महादेव को सर्प अत्यंत प्रिय हैं। इसलिए उनके प्रिय सावन मास में नाग पंचमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाने से भोलेनाथ प्रसन्न हो कर मनचाहा वरदान देते है।
नाग पूजन से कालसर्प दोष से छुटकारा
ज्योतिषी झा ने गरुड़ पुराण के हवाले से कहा कि सावन के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को नाग पंचमी के दिन व्रत रखकर मिट्टी या आटे का सर्प बनाकर उन्हें विभिन्न रंगों से सजाते हैं और सजाने के बाद फूल, खीर, दूध, लावा, धूप, दीप आदि से उनकी पूजा करते है।
जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है उन्हें इस दिन नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। इस दिन पूजा करने से कुंडली का यह दोष समाप्त हो जाता है। नाग पूजा के बाद “ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्” मंत्र से इनकी प्रार्थना करने से सर्पदोष और कालसर्प दोष के मुक्ति मिलती है।
परंपरागत विधि से मनेगी नाग पंचमी का पर्व
मिथिलांचल के श्रद्धालु आज नाग पंचमी के दिन अपने कुलदेवी एवं नाग देवता की विधि-विधान से पूजा कर खीर और महिआउर (खोरजाउर) का भोग अर्पित करेंगे। कुलदेवी की आराधना कर उनको लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री, ऋतुफल, फूलमाला चढ़ाकर भजन, नचारी व लोकगीत गाने के बाद आरती होगी। नाग-नागिन को दूध-लावा में निम्बू का रस मिलाकर चढ़ाया जाएगा।
वहीं, मगध प्रांत के धर्मावलंबी आज मंगलवार को घरों में नीम की पत्तियां लगाएंगे। फिर कई प्रकार के व्यंजन, पकवान आदि बनाकर अपने इष्टदेव को भोग स्वरूप में अर्पित करेंगे। भोग में माल पुआ, खीर, दालपुरी, आम, पका हुआ कटहल का फल प्रमुख होगा।
नागों की देवी मनसा देवी की होगी पूजा
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के मुताबिक उत्तरी भारत में नाग पंचमी के दिन मनसा देवी की भी पूजा होती है। देवी मनसा को नागों की देवी माना गया है। इसलिए बंगाल, उड़ीसा और अन्य क्षेत्रों में मनसा देवी के दर्शन व उपासना का भी विधान है।
नागपंचमी पर रुद्राभिषेक का भी अत्यंत महत्व है। पुराणों के अनुसार पृथ्वी का भार शेषनाग ने अपने सिर पर उठाया हुआ है इसलिए उनकी पूजा का विशेष महत्व है। ये दिन गरुड़ पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है और नाग देवता के साथ इस दिन गरुड़ की भी पूजा होगी।
