Advertising
<

आज का एक्सप्लेनर: एक टुकड़ा पूरे कमरे का आम-केला पका सकता है, केरल में ऐसा 640 कंटेनर्स वाला जहाज डूबा; समुद्र में मिलना कितना खतरनाक

2
आज का एक्सप्लेनर:  एक टुकड़ा पूरे कमरे का आम-केला पका सकता है, केरल में ऐसा 640 कंटेनर्स वाला जहाज डूबा; समुद्र में मिलना कितना खतरनाक

आज का एक्सप्लेनर: एक टुकड़ा पूरे कमरे का आम-केला पका सकता है, केरल में ऐसा 640 कंटेनर्स वाला जहाज डूबा; समुद्र में मिलना कितना खतरनाक

कच्चे आम से भरे एक कमरे में कैल्शियम कार्बाइड का छोटा सा टुकड़ा रख दीजिए। इससे निकली खतरनाक एसिटिलीन गैस 2-3 दिनों में पूरे कमरे के आम पका देगी।

.

जिस कैल्शियम कार्बाइड का एक टुकड़ा इतना घातक है, उससे भरे 12 विशाल कंटेनर्स भारत के पास समुद्र में गिर गए हैं। 25 मई को डूबे लाइबेरियाई जहाज में ऐसे 640 कंटेनर्स थे, जिनमें अलग-अलग केमिकल्स और तेल मौजूद था। इनमें से कुछ कंटेनर्स तो बहकर तटों तक पहुंच गए हैं।

आखिर 640 कंटेनर्स के साथ कैसे डूबा MSC एल्सा 3 शिप, इनमें ऐसा क्या है कि सरकार कंटेनर्स से 200 मीटर दूर रहने को कह रही है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: कोच्चि तट पर लाइबेरिया का कार्गो शिप MSC एल्सा 3 कैसे डूब गया? जवाब: 23 मई यानी शुक्रवार को केरल के विझिंजम बंदरगाह से लाइबेरियन कार्गो शिप MSC एल्सा 3 केरल के ही कोच्चि बंदरगाह के लिए रवाना हुआ।

केरल के बंदरगाह मंत्री वीएन वासवन ने कहा,

Advertising

जहाज के झुकने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन आशंका है कि तेज हवाओं, लहरों या लोडिंग की समस्याओं की वजह से हादसा हुआ होगा।

QuoteImage

इंडियन कोस्ट गार्ड के मुताबिक, 25 मई को जहाज के होल्ड में तेजी से पानी भरने लगा था, जिस वजह से वह पलटकर डूब गया। कार्गो शिप पर 1 रूसी कैप्टन, 1 यूक्रेनी, 2 जॉर्जियाई और फिलीपींस के 20 लोग शामिल थे।

MSC एल्सा 3 को 1997 में बनाया गया था। इसका मैनेजमेंट दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी MSC के पास है, जो जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है। 28 साल पुराने इस जहाज का आखिरी पोर्ट स्टेट कंट्रोल निरीक्षण 19 नवंबर 2024 को मैंगलोर में हुआ था, तब इसमें 5 कमियां पाई गई थीं। यह कार्गो शिप 183 मीटर लम्बा और 25 मीटर चौड़ा है। यानी यह साइज में दो फुटबॉल ग्राउंड जितना बड़ा है।

25 मई को कार्गो शिप पूरी तरह से डूब गया।

सवाल-2: कार्गो शिप पर मौजूद 640 कंटेनर्स में क्या था और उनका क्या हुआ? जवाब: भारत के रक्षा मंत्रालय ने 25 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट कर बताया, ‘इस शिप में 640 कंटेनर्स थे। इन 13 कंटेनर्स में खतरनाक केमिकल्स थे और 12 कंटेनर्स में कैल्शियम कार्बाइड था। इसके अलावा जहाज के टैंकों में 84.44 मीट्रिक टन डीजल और 367.1 मीट्रिक टन फर्नेस ऑयल भी था।’

इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशियन इन्फॉर्मेशन सर्विसेज यानी INCOIS के मुताबिक, कंटेनरों या बाहरी चीजों का पता लगाने के लिए खोज और बचाव सहायता उपकरण को एक्टिव कर दिया गया। इसके अलावा किसी भी तेल रिसाव पर नजर रखने के लिए सिमुलेशन चलाए गए हैं।

सवाल-3: कार्गो शिप के कंटेनर्स में मौजूद सामान कितने खतरनाक हैं? जवाब: केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी KSDMA ने केरल में तटीय इलाकों पर इमरजेंसी लगा दी है। मछुआरों और लोगों को तटीय इलाकों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। कंटेनर्स में मौजूद केमिकल्स का पानी में मिलने का डर है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों से समुद्र तट पर बहकर आए कंटेनरों या तेल को न छूने और फौरन पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है।

इस कार्गो शिप में 3 खतरनाक केमिकल्स और फ्यूल मौजूद थे…

1. कैल्शियम कार्बाइड: 12 कंटेनर्स में कैल्शियम कार्बाइड यानी CaC₂ मौजूद है। यह एक केमिकल कम्पाउंड है, जो ग्रे या काले रंग का ठोस पदार्थ होता है। यह इंडस्ट्रियल फॉर्म से एसिटिलीन गैस को बनाने, स्टील निर्माण और फल पकाने में इस्तेमाल किया जाता है।

कैल्शियम कार्बाइड पानी के साथ मिलने पर एसिटिलीन गैस (C₂H₂) और कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Ca(OH)₂) उत्पन्न करता है। एसिटिलीन गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है और हवा में 2.5% से 82% की सांद्रता पर विस्फोट कर सकती है। यह गैस छोटी सी चिनगारी या गर्मी से आग पकड़ सकती है, जिससे समुद्र में विस्फोट भी हो सकता है।

अगर कंटेनर में मौजूद कैल्शियम कार्बाइड समुद्र के पानी में मिल गया, तो यह तेजी से एसिटिलीन गैस बनाएगा। यह गैस हवा में जमा हो जाएगी और विस्फोट कर सकती है। कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड पानी के pH को बढ़ा देता है, जिससे समुद्र का इकोसिस्टम बिगड़ जाता है। यह मछलियों, कोरल और अन्य पानी वाले जीवों के लिए जानलेवा हो सकता है।

2. मरीन गैस ऑयल: शिप में 84.44 मीट्रिक टन मरीन गैस ऑयल यानी डीजल भी था, जिसका इस्तेमाल जहाज को चलाने के लिए किया जाता है। यह हाइड्रोकार्बन से बना होता है, जिसमें एल्केन और एरोमैटिक कम्पाउंड्स होते हैं। यह पानी की सतह पर तैरता रहता है, जिससे ऑक्सीजन कम होती है और समुद्री जीवन प्रभावित होता है। यह लम्बे समय तक समुद्र में रह सकता है और तटीय इलाकों में जमा हो जाता है।

दरअसल, डीजल पानी की सतह पर एक पतली परत बनाता है, जो सूर्य की किरणों और ऑक्सीजन को पानी में जाने से रोकती है। INCOIS के अनुसार, यह 36 से 48 घंटों में अलप्पुझा, कोल्लम, एर्नाकुलम और तिरुवनंतपुरम तक पहुंच सकता है।

3. फर्नेस ऑयल: यह एक भारी ईंधन तेल है, जो जहाजों के इंजन को चलाने के लिए इस्तेमाल होता है। शिप में 367.1 मीट्रिक टन फर्नेस ऑयल मौजूद था। यह डीजल से ज्यादा गाढ़ा और जटिल हाइड्रोकार्बन मिश्रण होता है, जिसमें सल्फर की मात्रा कम होती है। यह पानी में आसानी से नहीं फैलता, लेकिन यह समुद्री तल पर जमा हो सकता है, जिससे लम्बे समय तक प्रदूषण होता है।

इसमें भारी धातु यानी निकल, वैनेडियम और PAHs होते हैं, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। भारी होने की वजह से यह समुद्र तल तक डूब सकता है। यह समुद्री पौधों, मछलियों, पक्षियों और स्तनधारी जीवों को खत्म कर सकता है।

इनके अलावा बाकी कंटेनर्स में भी खतरनाक कैमिकल्स मौजूद हैं, जिनकी जानकारी नहीं मिल पाई है।

ICG, नौसेना, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और तटीय पुलिस जहाजों और विमानों के जरिए लगातार निगरानी कर रहे हैं। ICG के मुताबिक यह कंटेनर्स 1 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से तटीय इलाकों की तरफ बढ़ रहे। इसे लेकर केरल में अलर्ट जारी किया गया है।

सवाल-4: अगर तेल या केमिकल रिसाव हुआ, तो इसे कैसे साफ किया जाएगा? जवाब: समुद्र में Oil Spill यानी तेल रिसाव को साफ करने के लिए कई तकनीक और तरीके अपनाए जाते हैं, जो रिसाव की मात्रा, उसके प्रकार, जगह और मौसम पर निर्भर करते हैं…

1. तेल को फैलने से रोकना: तेल रिसाव वाली जगह के चारों ओर Booms को फैलाया जाता है, ताकि तेल आगे न फैले। ये लंबी और तैरने वाली रबर या प्लास्टिक की दीवारें होती हैं, जो तेल को एक जगह इकट्ठा करती हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल रिसाव के तुरंत बाद किया जाता है।

2. तेल को पानी से निकालना: इसमें मशीन के जरिए तेल हटाया जाता है। इसमें Skimmers मशीनों या बोट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो पानी से तेल खींचकर कंटेनरों में भर देती हैं। इसका इस्तेमाल समुद्री सतह के ठहरे पानी में किया जाता है।

3. तेल को छोटे टुकड़ों में तोड़ना: गहरे पानी में फैले तेल को साफ करने के लिए Dispersants जैसे केमिकल्स डाले जाते हैं, जो तेल को छोटे-छोटे कणों में तोड़ देते हैं। फिर ये पानी में घुलकर बायो डिग्रेड यानी नष्ट हो जाते हैं। हालांकि ये तरीका समुद्री इकोसिस्टम के लिए अच्छा नहीं है।

4. समुद्र पर ही तेल जलाना: अगर तेल ताजा और मोटी परत में है, तो उसे वहीं समुद्र पर जलाया जाता है। इससे 90% तक तेल खत्म किया जा सकता है, लेकिन इससे काफी धुआं और जहरीली गैसें निकलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण होता है।

5. तेल सोखने वाले पदार्थ डालना: पुआल, ज्वालामुखीय राख, स्पंज, फाइबर जैसे मैटीरियल तेल सोख लेते हैं। इन्हें तेल रिसाव वाले इलाके में डालकर तेल सोखा जा सकता है। ये छोटे रिसाव या तटीय इलाकों में कारगर होते हैं।

6. तेल को खाने वाले बैक्टीरिया डालना: पैरापरलुसीडिबाका, साइक्लोक्लास्टिकसजैसे बैक्टीरिया या माइक्रोब्स होते हैं, जो तेल को जैविक रूप से तोड़ देते हैं। इनका तेल रिसाव में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल तब होता है, जब सफाई के दूसरे ऑप्शन कमजोर पड़ जाते हैं।

सवाल-5: अगर शिप में मौजूद तेल समुद्री पानी में मिल गया तो क्या होगा? जवाब: इसके 3 बड़े इम्पैक्ट होंगे…

1. बड़ी संख्या में समुद्री जीवों की मौत

  • डॉल्फिन, व्हेल, कछुओं, ऑक्टोपस, ऊदबिलाव समेत तमाम तरह की मछलियों और समुद्री जीवों को बीमारी हो सकती है। तेल से उनकी त्वचा, गलफड़ों और आंतरिक अंगों को नुकसान होता है।
  • इसके अलावा फुलमार, किट्टीवेक, गिलमोट, समुद्री बगुले जैसे पक्षी अगर समुद्र पर उतरते हैं तो तेल के कारण उनके पंख और त्वचा को नुकसान होगा, जिससे उनके उड़ने और जलरोधी क्षमता खत्म हो जाएगी।

2. समुद्र की इकोलॉजी को नुकसान

  • समुद्र की गहराई में बनने वाली सुंदर कोरल रीफ्स की प्रजनन और बढ़ोतरी रुक सकती है।
  • समुद्री सतह पर तेल होने के कारण धूप गहराई तक नहीं जा पाएगी, जिससे वनस्पतियों और जीवों को नुकसान होगा।

3. इंसानों की सेहत और कमाई पर असर

  • मछली पालन, बोटिंग और टूरिज्म के बिजनेस को नुकसान होगा। साथ ही समुद्र से तेल निकालने और सफाई करने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च होंगे।
  • अगर किसी ने तेल मिले समुद्री पानी में नहा लिया, तो उसकी चमड़ी पर असर होगा। अगर किसी ने दूषित मछली खा ली, तो उसे सांस और पेट की दिक्कतें हो सकती हैं।

सवाल-6: क्या पहले भी जहाज के डूबने से तेल या केमिकल रिसाव की घटनाएं हो चुकी है? जवाब: हम यहां दुनियाभर के 4 बड़े हादसे बता रहे हैं, इसमें लाखों समुद्री जीवों की मौत हुई और कई लोग मारे गए…

कल सुबह 6 बजे ऐसे ही बेहद जरूरी टॉपिक पर पढ़िए और देखिए एक और ‘आज का एक्सप्लेनर’

—————————

जहाजों के डूबने से जुड़ी अन्य खबर पढ़ें-

केरल में लाइबेरिया का कार्गो शिप डूबा: नेवी और कोस्टगार्ड ने सभी 24 क्रू मेंबर्स का रेस्क्यू किया; कंटेनर्स में खतरनाक केमिकल थे

केरल में कोच्चि तट पर लाइबेरिया का कार्गो शिप MSC एल्सा 3 डूब गया। इंडियन कोस्ट गार्ड (ICG) और नेवी ने सभी 24 क्रू मेंबर्स को बचा लिया गया। शिप पर लदे 640 कंटेनर्स में कैल्शियम कार्बाइड, डीजल, फर्नेस ऑयल समेत कुछ खतरनाक केमिकल्स भरे थे। पूरी खबर पढ़ें…