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अमृतसर के तरणजीत संधू बने दिल्ली के उप-राज्यपाल: अमेरिका-श्रीलंका में भारत के राजदूत रहे, लोकसभा चुनाव भी लड़ा; दादा बड़े सिख नेता थे – Amritsar News

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अमृतसर के तरणजीत संधू बने दिल्ली के उप-राज्यपाल:  अमेरिका-श्रीलंका में भारत के राजदूत रहे, लोकसभा चुनाव भी लड़ा; दादा बड़े सिख नेता थे – Amritsar News

अमृतसर के तरणजीत संधू बने दिल्ली के उप-राज्यपाल: अमेरिका-श्रीलंका में भारत के राजदूत रहे, लोकसभा चुनाव भी लड़ा; दादा बड़े सिख नेता थे – Amritsar News

दिल्ली के नए उप-राज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की फाइल फोटो।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को 7 राज्यों और 2 केंद्र शासित राज्यों का राज्यपाल और एलजी बदले। इसमें अमृतसर के रहने वाले तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उप-राज्यपाल बनाया गया। वो एलजी विनय कुमार सक्सेना की जगह लेंगे, जिन्हें अब लद्दाख का उप-

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तरणजीत सिंह संधू का जन्म एक प्रतिष्ठित सिख परिवार में हुआ और उनके दादा तेजा सिंह समुंदरी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संस्थापकों में से एक माने जाते हैं। पढ़ाई की बात करें तो संधू ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और बाद में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से मास्टर डिग्री हासिल की।

संधू ने पोलिटिक्स में भी कदम रखा था। आइए जानते हैं तरणजीत सिंह संधू के बारे में…

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी और पूर्व राजदूत के साथतरनजीत संधू की फाइल फोटो।

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तरणजीत संधू का अमृतसर से दिल्ली तक का सफर…

  • अमृतसर में जन्म, दादा बड़े सिख नेताः तरणजीत सिंह संधू का जन्म अमृतसर के सिख परिवार में हुआ। उनके दादा तेजा सिंह समुंदरी गुरुद्वारा सुधार आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के शुरुआती नेताओं में गिने जाते हैं। उनके नाम पर तेजा सिंह समुंदरी हॉल भी है।
  • पिता वाइस चांसलर थे, मां प्रिंसिपल रहींः तरणजीत सिंह संधू के पिता प्रोफेसर बिशन सिंह समुंदरी अमृतसर के ऐतिहासिक खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल रहे और बाद में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पहले वाइस चांसलर बने। उनकी माता डॉ. जगजीत कौर संधू ने अमेरिका से पीएचडी की पढ़ाई की और भारत लौटकर अमृतसर के गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन की प्रिंसिपल के रूप में सेवा की।
  • सेंट स्टीफेंस और JNU से की पढ़ाईः संधू ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में मास्टर डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि अंतरराष्ट्रीय संबंध और कूटनीति की ओर बढ़ी।
  • 1998 में IFS जॉइन कीः साल 1988 में उन्होंने भारतीय विदेश सेवा यानी IFS जॉइन की और लगभग तीन दशक से अधिक समय तक भारत की कूटनीति में अहम भूमिका निभाई। संधू ने अपनी राजनयिक यात्रा की शुरुआत यूक्रेन में भारतीय दूतावास खोलने और वहां राजनीतिक एवं प्रशासनिक विंग के प्रमुख के रूप में की।
  • पूर्व राजदूत से ही हुई थी शादीः संधू का शादी रीनात संधू से हुई थी। वो इटली और नीदरलैंड में भारत की सेवानिवृत्त राजदूत रह चुकी हैं। दोनों के दो बच्चे, एक बेटा और एक बेटी। दोनों की मुलाकात एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान हुई थी।
  • अमेरिका-श्रीलंका में राजदूत रहेः उन्होंने वाशिंगटन डीसी में प्रथम सचिव, फ्रैंकफर्ट में महावाणिज्य दूत, वाशिंगटन में उप मुख्य दूतावास अधिकारी और विदेश मंत्रालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी उन्होंने सेवाएं दीं।
  • लंबा कूटनीतिक अनुभव तीन दशक से अधिक लंबे कूटनीतिक अनुभव के कारण उन्हें भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण चेहरों में गिना जाता है। सबसे ज्यादा पहचान तब मिली, जब उन्हें 2020 में अमेरिका में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया। यूनाइडेट स्टेट में भारत के राजदूत के रूप में उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान रक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के कई अहम समझौते हुए।

जब 2024 में भाजप में शामिल हुए थे संधू।

2024 में राजनीति में कदम रखा

डिप्लोमैटिक करियर से रिटायर होने के बाद संधू ने राजनीति में कदम रखा और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से अमृतसर सीट से चुनाव भी लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उन्हें जीत नहीं मिल सकी।

दिल्ली के उप-राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी

अब दिल्ली के उप-राज्यपाल के रूप में तरणजीत सिंह संधू के सामने राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासन, विकास और केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाने जैसी कई अहम जिम्मेदारियां होगी।

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