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‘अब भी टाइम है, समझौता कर लो, वरना…’, 37 हजार करोड़ का ब्रिज तबाह करने के बाद ईरान को ट्रंप की नई धमकी

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‘अब भी टाइम है, समझौता कर लो, वरना…’, 37 हजार करोड़ का ब्रिज तबाह करने के बाद ईरान को ट्रंप की नई धमकी


‘अब भी टाइम है, समझौता कर लो, वरना…’, 37 हजार करोड़ का ब्रिज तबाह करने के बाद ईरान को ट्रंप की नई धमकी

मिडिल ईस्ट के सबसे ऊंचे ब्रिज B1 पर हवाई हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. ट्रंप ने कहा कि अभी भी वक्त है और समझौता कर लो, नहीं तो बहुत देर हो जाएगी. बी1 पुल ईरान के अलबोर्ज प्रांत के करज इलाके में स्थित है जो कि निर्माणाधीन है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हवाई हमले में इस ब्रिज को नुकसान पहुंचा है. इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई, जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो गई है. यह पुल राजधानी तेहरान को पश्चिमी शहर करज से जोड़ने वाला अहम हाईवे ब्रिज था, जो लगभग बनकर तैयार हो चुका था. 

इस प्रोजेक्ट पर करीब 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 37 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए थे. करीब 1050 मीटर लंबे इस पुल को मिडिल ईस्ट के सबसे बड़े पुलों में गिना जा रहा था.

इस हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि यह ईरान के सबसे बड़े पुल पर हमला है. ट्रंप ने आक्रामक लहजे में कहा, ‘अभी भी वक्त है, समझौता कर लो, नहीं तो बहुत देर हो जाएगी. अगर ईरान ने अपना रुख नहीं बदला तो उसमें कुछ भी नहीं बचेगा जबकि वह अब भी महान देश बन सकता है.’

ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने साफ संकेत दिया कि अगर हालात नहीं बदले तो आगे और हमले हो सकते हैं.

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हमले के बाद ईरान के सरकारी मीडिया और प्रेस टीवी ने भी पुष्टि की है कि B1 ब्रिज को निशाना बनाया गया, जिससे इलाके में बिजली संकट पैदा हो गया है.

गौरतलब है कि पिछले करीब डेढ़ साल से मिडिल ईस्ट लगातार संघर्ष की आग में जल रहा है. अक्टूबर 2023 में गाजा में इजरायल-हमास के बीच युद्ध की शुरुआत हुई थी, जो धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल गई. इसके बाद इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले किए, वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाया.

ईरान इस पूरे संघर्ष में एक अहम भूमिका निभा रहा है. माना जाता है कि वह हमास, हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठनों को समर्थन देता रहा है, जिस कारण वह लगातार निशाने पर है. हाल के महीनों में ईरान और इजरायल के बीच सीधे मिसाइल और ड्रोन हमले भी हो चुके हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है.

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