अधिकतम तापमान पहुंचा 43 डिग्री पर, जनजीवन अस्त- व्यस्त h3>
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दरभंगा, हिटी। जिले में मंगलवार को अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी 27 डिग्री रहने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। कई बुजुर्गों ने कहा कि अप्रैल महीने में पहली बार इतनी अधिक गर्मी पड़ रही है। जानकार लोग इसे जलवायु परिवर्तन का असर बता रहे हैं।
बदन झुलसाने वाली धूप के कारण सुबह 10 बजे के बाद लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। तेज पछिया हवा के कारण दिनभर धूल उड़ने से राहगीरों को भी आवागमन करने में परेशानी हो रही है। मंगलवार को 11 बजे छुट्टी होने के बाद कई छोटे निजी स्कूलों के बच्चों को अपने अभिभावकों के साथ दोपहिया वाहन से कड़ी धूप में घर जाते देखा गया। इस दौरान जगह-जगह ट्रैफिक जाम रहने से कड़ी धूप में बच्चे बिलबिला गए। लू की स्थिति को देखते हुए सभी स्कूलों में 11 बजे तक ही पठन-पाठन करने का निर्देश दिया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अभी तीन दिनों तक मौसम में किसी तरह के बदलाव के आसार नहीं हैं।
बता दें कि मौसम विभाग की ओर से पहली बार भीषण गर्मी के लिए जारी किये गए रेड अलर्ट में दरभंगा को भी शामिल किया गया है। अधिकतम तापमान 43 डिग्री पर पहुंच जाने से लोग दिनभर गर्म हवा के थपेड़े झेलने को विवश हैं। दोपहर में लू की स्थिति देख लोग बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं। फलस्वरूप दोपहर में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजारों में सन्नाटा पसारा रहता है। शाम पांच बजे के बाद ही लोग बाहर निकल रहे हैं।
मिर्जापुर के प्रमोद गुप्ता ने कहा कि अप्रैल में पहली बार इस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे मौसम में बीमार पड़ने की भी आशंका है। वहीं, प्रोफेसर कॉलोनी के पवन झा ने कहा कि इस भीषण गर्मी में जल संकट भी उत्पन्न हो गया है। जिनके घर में सामान्य मोटर है उन्हें दोपहर में पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। उधर, मौसम की तल्खी से किसान भी परेशान हैं। फसल में पटवन करते-करते वे परेशान हो रहे हैं। इसके बावजूद सब्जी की फसल सूखती जा रही है। भीषण गर्मी के कारण फुटपाथी दुकानदारों और दिहाड़ी मजदूरों को अधिक परेशानी हो रही है। दुकानदारों की जहां दोपहर में बिक्री ठप हो जाती है वहीं दिहाड़ी मजदूर कड़ी धूप के बीच भी काम करने को विवश हैं।
मजदूरों के लिए उपलब्ध कराएं सुविधाएं
लहेरियासराय, एक संवाददाता। भीषण गर्मी और तेज धूप को देखते हुए श्रम अधीक्षक राकेश रंजन ने जिले के सभी नियोजकों व ठेकेदारों को मजदूरों को सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है।
उन्होंने कहा है कि कार्यस्थलों पर तेज धूप, गर्मी और लू से कामगारों व मजदूरों के बचाव के लिए शेड निर्माण, पेयजल की सुविधा तथा प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट रखने का निर्देश दिया गया है। सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रांतर्गत ऐसे सभी प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया गया है, जहां खुले में कामगार एवं मजदूर काम कर रहे हों।
श्रम अधीक्षक ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के आलोक में लू से बचाव के लिए मजदूरों के कार्य अवधि को लचीला किया जा सकता है। लू चलने पर कार्य अवधि को सुबह छह से 11 बजे तथा अपराह्न तीन से 06:30 बजे तक निर्धारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कार्य स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तथा लू लगने पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए। खुले में तथा कल-कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेयजल व आईसपैड की व्यवस्था करने के साथ शेड की भी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लू से बचाव के लिए औद्योगिक मजदूरों एवं अन्य मजदूरों के बीच जाकर जागरूकता कैम्प लगवाया जाय तथा सभी नियाजकों व कामगारों एवं मजदूरों को लू से बचाव संबंधी जानकारी दी जाए। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका का अनुपालन नहीं करने वाले नियोजकों एवं ठेकेदारों को नोटिस निर्गत कर कारवाई की जाएगी।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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दरभंगा, हिटी। जिले में मंगलवार को अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी 27 डिग्री रहने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। कई बुजुर्गों ने कहा कि अप्रैल महीने में पहली बार इतनी अधिक गर्मी पड़ रही है। जानकार लोग इसे जलवायु परिवर्तन का असर बता रहे हैं।
बदन झुलसाने वाली धूप के कारण सुबह 10 बजे के बाद लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। तेज पछिया हवा के कारण दिनभर धूल उड़ने से राहगीरों को भी आवागमन करने में परेशानी हो रही है। मंगलवार को 11 बजे छुट्टी होने के बाद कई छोटे निजी स्कूलों के बच्चों को अपने अभिभावकों के साथ दोपहिया वाहन से कड़ी धूप में घर जाते देखा गया। इस दौरान जगह-जगह ट्रैफिक जाम रहने से कड़ी धूप में बच्चे बिलबिला गए। लू की स्थिति को देखते हुए सभी स्कूलों में 11 बजे तक ही पठन-पाठन करने का निर्देश दिया गया है। मौसम विभाग के अनुसार अभी तीन दिनों तक मौसम में किसी तरह के बदलाव के आसार नहीं हैं।
बता दें कि मौसम विभाग की ओर से पहली बार भीषण गर्मी के लिए जारी किये गए रेड अलर्ट में दरभंगा को भी शामिल किया गया है। अधिकतम तापमान 43 डिग्री पर पहुंच जाने से लोग दिनभर गर्म हवा के थपेड़े झेलने को विवश हैं। दोपहर में लू की स्थिति देख लोग बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं। फलस्वरूप दोपहर में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजारों में सन्नाटा पसारा रहता है। शाम पांच बजे के बाद ही लोग बाहर निकल रहे हैं।
मिर्जापुर के प्रमोद गुप्ता ने कहा कि अप्रैल में पहली बार इस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे मौसम में बीमार पड़ने की भी आशंका है। वहीं, प्रोफेसर कॉलोनी के पवन झा ने कहा कि इस भीषण गर्मी में जल संकट भी उत्पन्न हो गया है। जिनके घर में सामान्य मोटर है उन्हें दोपहर में पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। उधर, मौसम की तल्खी से किसान भी परेशान हैं। फसल में पटवन करते-करते वे परेशान हो रहे हैं। इसके बावजूद सब्जी की फसल सूखती जा रही है। भीषण गर्मी के कारण फुटपाथी दुकानदारों और दिहाड़ी मजदूरों को अधिक परेशानी हो रही है। दुकानदारों की जहां दोपहर में बिक्री ठप हो जाती है वहीं दिहाड़ी मजदूर कड़ी धूप के बीच भी काम करने को विवश हैं।
मजदूरों के लिए उपलब्ध कराएं सुविधाएं
लहेरियासराय, एक संवाददाता। भीषण गर्मी और तेज धूप को देखते हुए श्रम अधीक्षक राकेश रंजन ने जिले के सभी नियोजकों व ठेकेदारों को मजदूरों को सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश जारी किया है।
उन्होंने कहा है कि कार्यस्थलों पर तेज धूप, गर्मी और लू से कामगारों व मजदूरों के बचाव के लिए शेड निर्माण, पेयजल की सुविधा तथा प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट रखने का निर्देश दिया गया है। सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को अपने क्षेत्रांतर्गत ऐसे सभी प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया गया है, जहां खुले में कामगार एवं मजदूर काम कर रहे हों।
श्रम अधीक्षक ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के आलोक में लू से बचाव के लिए मजदूरों के कार्य अवधि को लचीला किया जा सकता है। लू चलने पर कार्य अवधि को सुबह छह से 11 बजे तथा अपराह्न तीन से 06:30 बजे तक निर्धारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कार्य स्थल पर पेयजल की व्यवस्था तथा लू लगने पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए। खुले में तथा कल-कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेयजल व आईसपैड की व्यवस्था करने के साथ शेड की भी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि लू से बचाव के लिए औद्योगिक मजदूरों एवं अन्य मजदूरों के बीच जाकर जागरूकता कैम्प लगवाया जाय तथा सभी नियाजकों व कामगारों एवं मजदूरों को लू से बचाव संबंधी जानकारी दी जाए। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका का अनुपालन नहीं करने वाले नियोजकों एवं ठेकेदारों को नोटिस निर्गत कर कारवाई की जाएगी।
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