क्या भारतीय इतिहास को दोबारा लिखना सही होगा ?

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भारतीय इतिहास
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क्या भारतीय इतिहास को दोबारा लिखना सही होगा ? ( Would it be right to rewrite Indian history ? )

इतिहास एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है. जिसके बारे में लोगों के अलग अलग मत हो सकते हैं. कुछ लोगों मानते हैं कि इतिहास के बारें में जानने से हमें क्या फायदा होगा इसकी जगह हमें विज्ञान जैसे विषयों को बढावा देना चाहिएं. जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इतिहास का भी अपना विशेष महत्व होता है. इतिहास का महत्व इस बात से भी बढ़ जाता है कि काफी चर्चित व्यक्ति इस बात पर अपनी राय रख चुके हैं कि इतिहास को नए सिरे से लिखने की आवश्यकता है. लेकिन क्या भारतीय इतिहास को दोबारा लिखने की जरूरत है और क्या ऐसा करना सही होगा ?

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इतिहास में शोध का महत्व-

इतिहास की बात करें, तो इसका अर्थ होता है कि निश्चित तौर पर ऐसा ही हुआ होगा. इतिहास में हम मानव जीवन के अतीत से जुड़ी घटनाओं के बारे में पढ़ते हैं. लेकिन हमारे सामने समस्या यह आती है कि जिस अतीत का अध्ययन हम कर रहे हैं या जिसका इतिहास लिखा जा रहा है उसके लिए हम या तो पुरातात्विक वस्तुओं पर निर्भर करते हैं या फिर पाठ्यात्मक स्त्रोतों पर.

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जिसमें हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिएं कि पाठ्यात्मक स्त्रोतों के रचनाकार इंसान ही हैं. वो कहीं ना कहीं किसी पूर्वाग्रह से या फिर किसी समुदाय से संबंधित होने के कारण ना चाहते हुए भी उसमें कुछ कमियां रह सकती है. इसके साथ ही हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि इतिहास में समय के साथ साथ नए नए शोध होते रहते हैं तथा नए विचार आते रहते हैं. कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है जो इतिहास हम वर्षों से पढ रहे हैं, उस पर हुए नए शोध से उसमें बदलाव आ जाता है. इसलिए इतिहास में निश्चित रूप से जो हुए है, उसके करीब जाने के लिए लगातार इतिहास पर शोध होना जरूरी होता है.

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इतिहास दोबारा लिखने की जरूरत ?

अगर बात करें, कि क्या भारतीय इतिहास को दोबारा लिखने की जरूरत है, तो इस सवाल के जवाब में हम कह सकते हैं कि इतिहास पर शोध करने में कोई बुराई नहीं है, जबकि यह तो इतिहास लेखन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए इतिहास को दोबारा लिखने या उस पर शोध करने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन इसके साथ ही हमें इस बात के प्रति भी सचेत रहने की आवश्यता है कि इतिहास लेखन करते समय हमें पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं अपनाना चाहिएं. जैसे कई बार इतिहासकार अपने देश , समुदाय या धर्म के बारे में सिर्फ अच्छी बातों का ही जिक्र करते हैं तथा उनकी कमियों को छुपाने की कोशिश करते हैं. इतिहास में हमेंशा वस्तुनिष्टता का ध्यान रखना जरूरी है. लेकिन इतिहास कभी भी धर्म या जाति को ध्यान में रखकर नहीं लिखा जाना चाहिएं.

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