दुनियां की सबसे ऊंचा भगवान श्री कृष्ण का अद्भुत चंद्रोदय मंदिर

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भारत अपने शुराआती दौर से ही चमत्कारों का देश रहा है। खासकर मंदिरों में ये चमत्कार होते रहे हैं। इन अद्भूत मंदिरों के चमत्कार सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बिख्यात है। दोस्तों क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा मंदिर बन रहा है। जो दुनियां के सबसे ऊंचे मंदिरों की सूची में सबसे ऊपर होगा और जहां आपको कृष्ण और राधा के समय में होने वाले हर लीला का एहसास होगा। तो आज आप इस वीडियो में देखेंगे जानेंगे भारत में बन रहे दुनियां के सबसे ऊंचे मंदिर की योजना के बारे में, कि क्या सुविधाएं प्राप्त होंगी इस मंदिर में। कौन निर्माण कर रहा है इस भव्य विशाल मंदिर का। पूरी दुनियां में इस मंदिर की क्या भूमिका रहेगी औऱ क्या विशेष है इस मंदिर प्रांगन में। कृष्ण की पावन नगरी मथुरा और वृंदावन को कौन नहीं जानता। ये पावन नगरी दुनियां के हर कोने में मशहूर है और देश-विदेश के लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं। कृष्ण की इसी पावन नगरी में बनने जा रहा है दुनियां का सबसे ऊंचा मंदिर जिसे दुनियां चंद्रोदय के नाम से जानती है। वृंदावन चंद्रोदय मंदिर उत्तर-प्रदेश के वृंदावन में भगवान को समर्पित एक मंदिर है, जो अभी निर्माणधीन है। इसे इस्कॉन के बैंगलोर इकाई की संकल्प द्वारा कुल 300 करोड़ की इकाई से निर्मित किया जा रहा है। इस मंदिर के मुख्य आराध्य देव भगवान श्रीकृष्ण होंगे। कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है, जबकि तय योजना के मुताबिक चंद्रोदय मंदिर की ऊंचाई दो सौ दस मीटर होगी। निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद यह दुनियां में भगवान श्रीकृष्ण का सबसे ऊंचा मंदिर होगा। यहां की चोटी से आगरा स्थित ताज़महल का मिनार भी देखा जाएगा। चलिये हम बात करते हैं इसके निर्माण योजना के बारे में। इसके निर्माण के लिए सतह से नीचे खुदाई करके 1.2 मीटर व्यास के करीब 60 मीटर यानि 20 मंजिला इमारत के बराबर। गहरे 500 पिलर बनाए गए हैं। मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने कहा है कि इसके निर्माण के जरिये वृंदावन के पहचान को पुन: स्थापित करने की यह एक कोशिश है। इस मौके पर गुरू शारनानंद ने कहा है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले निर्माण सामग्री और वास्तु शिल्प तक इतनी अनूठी बनाई जाए कि दुनियां के बड़े-बड़े विशेषज्ञों को यह चमत्कृत कर दे। वृंदावन में यूं तो 7000 के आसपास मंदिर है। लेकिन चंद्रोदय की परिकल्पना थोड़ी सी अलग है। इसकी परिकल्पना 1975 में श्रीला प्रभुपाद द्वारा वृंदावन के प्राचीन राधा दामोदर मंदिर में की गई थी। जानकारों की मानें तो चैतन्य महाप्रभु ने आज से पांच सौ वर्ष पूर्व वृंदावन को खोजा था। इसके बाद श्रीला प्रभुपाद ने महा मंत्र हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे के जरिए देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी कृष्ण भक्ति को पहुंचाया। उन्हीं की कल्पना थी कि प्रभु कृष्ण की लीलाधाम वृंदावन में एक ऐसा ही मंदिर का निर्माण होना चाहिए जो कि गगनचुंभी हो। प्राकृतिक आपदा के लिहाजे से भी इसे काफी मजबूत बनाया जा रहा है। अगर 8 रिक्टर स्केल से अधिक तीव्रता का भूकंप भी इसे क्षति नहीं पहुंचा सकेगा। इसके आलावा इसमें प्रयोग किए जाने वाले कांच और अन्य सामान भी भूकंप रोधी होंगे। ये 170 किलोमीटर की तीव्रता के तूफान को भी ये झेलने में सक्षम होगा। इस भव्य मंदिर के निर्माण में विदेशी आर्किटेक्चर के साथ-साथ डिज्नीलैंड की मॉडर्न तकनीक भी प्रयोग की जा रही है। इसकी भव्यता को बढ़ाने के लिए चारो ओर की पांच एकड़ भूमि में एक ऐसा वन बनाया जाएगा, जो ब्रजभूमि के समान होगा। जब यहां देश विदेश से भक्त आएंगे तो वे राधा-कृष्ण के समय के 12 वन उपवन, यमुना नदी और सभी लोकों समेत वेद परंपराओं का अद्भुत दर्शन कर पाएंगे। इसके मुख्य हिस्से में हॉल कृष्ण हैरिटेज म्यूजियम, वाचनालय और कृष्णलीला पार्क भी बनाया जाएगा। यहां डिज़्नीलैंड के तर्ज पर आधुनिक तकनीक से एनिमेशन के जरिए कृष्णलीला दिखायी जाएंगी। आगे की जानकारी के लिए वीडियो देखें।

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