जाने अमेरिका ने क्यो सुनाई पाकिस्तान को खरी खोटी

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जाने अमेरिका ने क्यो सुनाई पाकिस्तान को खरी खोटी

जम्मू-कश्मीर की हालात को लेकर अमेरिकी सीनेटरों ने अपनी चिंता जताई है. अमेरिकी सिनेटरों के अनुसार कश्मीर के ज्यादातर स्थानीय नेताओं-एक्टिविस्ट को कैद में रखना और इंटनेट बंद रखने को लेकर कहा कि ऐसा करने से कुछ नहीं होगा. इससे पहले भी अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को भारत का आंतरिक मामला बताया था.

अब अमेरिकी सीनेटरों ने पाक को भी आड़े हाथों लिया है. उनका कहना है कि अगर पाकिस्तान को अपनी स्थिति को बेहतर करना है. तो उसे अपने यहां पल रहे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ जल्द ही कर्रवाई करनी चाहिए.

दक्षिण एशिया में मानवाधिकारों को लेकर वाशिंगटन के कांग्रेसनल सब-कमेटी में रही चर्चा के दौरान एक्टिंग यूएस असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एलिस वेल्स ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हालातो को समान्य करने के लिए केंद्र ने जरूरी कदम उठाने के फैसले किए है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हमने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का समर्थन जरूर किया है. लेकिन घाटी में मौजूद हालात काफी खराब है जिसको लेकर वह बहुत ही चितिंत है.

इसी के साथ भारत सरकार से मानवाधिकार का सम्मान करने की बात कही है, साथ ही हमनें घाटी में सभी सेवाएं जिसमें इंटरनेट और मोबाइल फोन सेवा भी शामिल हैं, इन सभी पर चर्चा की और उन्हें बहाल करने की बात भी कही है. इससे पहले भी ट्रम्प प्रशासन ने कहा था कि वह जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के पीछे के भारत के मकसद का समर्थन करता है, लेकिन वह घाटी में मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित है.

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की अमेरिकी कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति की एशिया, प्रशांत एवं निरस्त्रीकरण उपसमिति को बताया था कि भारत सरकार ने तर्क दिया है कि अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त करने का फैसला आर्थिक विकास करने, भ्रष्टाचार कम करने और खासकर महिलाओं एवं अल्पसंख्यकों के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर में सभी राष्ट्रीय कानूनों को समानता से लागू करने के लिए लिया गया है.

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वेल्स ने कहा कि हम इन उद्देश्यों का समर्थन करते हैं, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्रालय कश्मीर घाटी में हालात को लेकर चिंतित है. पांच अगस्त के बाद से ही करीब 80 लाख लोगों का दैनिक जीवन पर बुरा प्रभाव ड़ाला है. जिसके बाद से ही अमेरिका जम्मू कश्मीर की इस हालात पर नजर बनाए रखे हुए है, हालांकि जम्मू और लद्दाख में हालात सुधरे है, लेकिन घाटी में सिथति अभी भी समान्य नहीं हो पाई है.