सवाल 123 – शनिदेव को तेल और तिल क्यों चढ़ाया जाता है?

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सवाल 123 - शनिदेव को तेल और तिल क्यों चढ़ाया जाता है?

जब भी शनिवार आता है तब लोग शनि मंदिर में तेल और तिल चढाते हुए दिखाई देते है और शनिवार के दिन शनि देव की मूर्ती पूरी तरह से तेल में डूबी नजर आती है. उस वक्त हमारें दिमाग में एक ही बात आती है कि आखिर भगवान शनि देव को सरसों का तेल और तील क्यो चढाते है. वो भी केवल शनिवार के दिन ही क्यों?

वैसे तो शनिदेव की अनेक कथाएं हमारे पुराणों में हैं. शनिग्रह को न्याय का देवता कहा जाता है, ऐसा कहा जाता है कि शनिदेव सभी प्राणियों के साथ न्याय करते हैं, इनके संबंध में कई भ्रान्तियां सुनने को मिलती हैं.

यदि कोई व्यक्ति समाज में किसी का बुराई नहीं करता, तो उसे शनिदेव से डरने की कोई जरुरत नहीं है. निर्दोष व्यक्ति को शनि देव कुछ नहीं करते, लेकिन जो दुष्ट व्यक्ति होता है उसे शनिदेव के कोप का से कोई नही बचा सकता है. कहा जाता कि शनिदेव की पूजा में तिल तथा तेल का बहुत महत्त्व है.

काला तिल, तेल, काला वस्त्र, काली उड़द शनि देव को अत्यंत प्रिय होते है. मान्यता है कि काला तिल और तेल से शनिदेव जल्द ही प्रसन्न करता है. यदि शनिदेव की पूजा इन वस्तुओं से की जाए तो ऐसी पूजा सफल मानी जाती है.

शनिवार का व्रत यूं तो आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन शुरू कर सकते हैं, परंतु मान्यता है कि श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारम्भ करना अति मंगलकारी माना जाता है. इस व्रत का पालन करने वाले को शनिवार के दिन प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके शनिदेव की प्रतिमा का विधि सहित पूजन करना चाहिए. शनि भक्तों को इस दिन शनि मंदिर में जाकर शनि देव को नीले लाजवन्ती का फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करना चाहिए.

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ऐसा कहा जाता है कि युद्ध के दौरान हनुमानजी ने शनि देव पर ऐसे तीखे प्रहार किए, जिसके कारण शनिदेव के शरीर पर काफी घाव बन गए. वह पीड़ा उनसे सहन नहीं हो रही थी. इसके बाद हनुमान जी ने शनिदेव को तिल का तेल लगाने के लिए दिया, जिससे उनका पूरा दर्द गायब हो गया था. यही वजह है कि शनिदेव को तेल और तील चढाया जाता है.