सवाल 7- कौन था भारत के इतिहास का सबसे शक्तिशाली शासक ?

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बहुत सही सवाल है। कौन बनेगा करोड़पति जो देखते होंगे उनको पता होगा इसका जवाब खैर जो नहीं देखते या जिनको नहीं पता हम बताते है |

चन्द्रगुप्त मौर्य और अशोक अभी तक का सबसे शक्तिशाली शासक थे ! उनका साम्राज्य 5,000,000 वर्ग किलोमीटर था ! यह आज के भारत का १५२% भाग है दोनों सम्राटों का विजय अभियान कभी किसी के द्वारा नहीं रोका गया !

चलो थोड़ा और समझते है इनके बारे में – 

भारत का सबसे शक्तिशाली शासक सम्राट अशोक था। चंद्रगुप्त मौर्य ने एक वृहद साम्राज्य की स्थापना की थी, अशोक ने कलिंग विजय के साथ इस साम्राज्य को विस्तृत किया। कलिंग की जीत के पश्चात अशोक की साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा काफी हद तक परिपूर्ण हो गयी क्योंकि करीब 300 ईसा पूर्व इससे बड़े साम्राज्य पर शासन करना लगभग असंभव था। कहते है कि कलिंग युद्ध की हिंसा ने अशोक को युद्ध से विमुख कर दिया और उसने धम्म विजय को आगे बढ़ाने का निश्चय किया। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि चूंकि साम्राज्य विस्तार की इच्छा पूर्ण हो गयी इसलिए अशोक ने अहिंसा का रास्ता अपनाया। कलिंग युद्ध के पश्चात अशोक ने एक धर्म निरपेक्ष और लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना की। जिसकी छाप आज भी भारतीय संविधान पर दिखती है। अशोक ने राज्य के कुछ आदर्श निर्धारित किए जो कुछ-कुछ आज के डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स ऑफ स्टेट पालिसी जैसे थे।अशोक ने कुशल विदेश नीति से पड़ोसी देशों से सौहाद्रपूर्ण संबंध स्थापित किए। अशोक ने सिटीजन चार्टर के समकक्ष प्रजा के ये राज्य के अधिकारियों के कर्तव्य निर्धारित किये। किसी भी राजा की शक्ति उसकी प्रजा होती है और राजा वही शक्तिशाली होता है जो प्रजा के दिल पर राज करे इसलिए हम अशोक को सबसे शक्तिशाली शासक मानते है।

चन्द्रगुप्त मौर्य

शासन केवल साम्राज्य विस्तार से नही होता। अगर ऐसा होता तो सिकंदर महान हो सकता था सबसे शक्तिशाली राजा। राजा का पहला कर्तव्य है “जनमत हिताए जनमत सुखाये” और इसका पालन चन्द्रगुप्त मौर्य ने किया । इसका श्रेय हमेशा चाणक्य को जाता है। आपका शासन केवल विस्तार पे नही टिक सकता स्थिरता भी उतनी ही चाहिए उस शासन में। चन्द्रगुप्त मौर्य के वक़्त भारत का विस्तार बहुत जाएदा हुआ और मगध के नाम से उसे हम जानते है। चन्द्रगुप्त मौर्य कलिंग को जीत सकता था लेकिन उसे पता था कि खून बहाने के बाद मिला शासन कोई काम का नही। इसलिए चन्द्रगुप्त मौर्य ने कभी कलिंग पे वो जीत हासिल नही की जो वो करना चाहते थे।

अगर मौर्य वंश फिर से आ जाए तो देखना चाहूंगा कैसे एक ब्राह्मण ने पूरे भारत को एक धागे से बांध कर स्थिरता और सुशासन का सपना पूरा किया।

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