भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए सुभाषचंद्र बोस को किसने प्रेरित किया ?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए सुभाषचंद्र बोस को किसने प्रेरित किया ? ( Who inspired Subhas Chandra Bose to join the Indian National Congress? )
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए सुभाषचंद्र बोस को किसने प्रेरित किया ? ( Who inspired Subhas Chandra Bose to join the Indian National Congress? )

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए सुभाषचंद्र बोस को किसने प्रेरित किया ? ( Who inspired Subhas Chandra Bose to join the Indian National Congress? )

15 अगस्त, 1947 को भारत को आजादी मिली. लेकिन इस आजादी के पीछे की कहानी में हमारे देश के कई वीर सपूतों का योगदान है. इन्हीं में से एक वीर सपूत हैं सुभाषचंद्र बोस. सुभाषचंद्र बोस को उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण ही पूरा भारत नेताजी के नाम से भी जानता है. आजाद हिंदी फौज का नेतृत्व करते हुए अंग्रेज सरकार को लौहे के चने चबाने पर मजबूर कर दिया. इसी कारण नेताजी के जीवन के बारे में लोगों के मन में सवाल होता है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित होने के लिए नेताजी को किसने प्रेरित किया. अगर आपके मन में भी यहीं सवाल है, तो इस पोस्ट में इस सवाल का जवाब जानते हैं.

किसने किया नेताजी को प्रेरित-

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महात्मा गांधी

दरअसल नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी का वर्ष 1920 में सिविल सेवा में चयन हुआ. लेकिन उस समय की राजनैतिक परिस्थितियों तथा असहयोग आंदोलन के दौरान देश के लिए कुछ करने के जज्बे की वजह से उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तिफा दे दिया. उस समय कांग्रेस का नेतृत्व महात्मा गांधी जी कर रहे थे. उन्होंने ही असहयोग आंदोलन की शुरूआत की थी.

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देशबंधु चितरंजनदास

सुभाषचंद्र बोस जी भविष्य में देश के लिए कुछ करने के इरादे से मार्गदर्शन के लिए महात्मा गांधी जी के पास आए. महात्मा गांधी जी ने उनके मन में देश के प्रति समर्पण की भावना को देखते हुए. उन्हें देशबंधु चितरंजन दास जी के पास मार्गदर्शन के लिए जाने को कहा. चितरंजन दास को ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस का राजनीतिक गुरू माना जाता है. नेताजी को राष्ट्रीय कांग्रेस में आने के लिए महात्मा गांधी जी और चितरंजन दास जी ने प्रेरित किया.

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने 1938 में हुए कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन की अध्यक्षता भी की थी. इस अधिवेशन में महात्मा गांधी जी सुभाषचंद्र बोस को अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में थे. लेकिन सुभाषचंद्र बोस के पहले भाषण को सुनने के बाद गांधी और नेताजी के बीच की काम करने की शैली को समझते हुए महात्मा गांधी ने 1939 के कांग्रेस अध्यक्ष के लिए नेताजी का समर्थन नहीं किया.

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