जहां आरती शुरू होते ही घुंघट से चेहरा ढंक लेती है महिलाएं

0
घूंघट से चेहरा ढक लेती है महिलाएं

उज्जैन में एक ऐसा मंदिर भी जहां आरती शुरू होते ही घुंघट से चेहरा ढंक लेती है महिलाएं

उज्जैन। क्या कभी आपने किसी भी मंदिर में होने वाली आरती के समय मौजूद महिलाओं को घुंघट से चेहरा ढंकते हुयेदेखा है या फिर किसी मंदिर में ऐसा नियम है कि आरती शुरू होते ही महिलाओं को चेहरा ढंकना अनिवार्य होता है, अन्यथाऐसा करने से वे पाप की भागीदार बन जाती है…उत्तर नहीं में ही होगा, लेकिन उज्जैन का महाकाल मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां तड़के 4 बजे होने वाली अनूठी भस्मारती के समय मंदिर में मौजूद महिला श्रद्धालुओं को अपना पूरा चेहराघुंघट की आड़ में करना ही होता है।

घूंघट से चेहरा ढक लेती है महिलाएं

दरअसल ऐसा माना जाता है कि बाबा महाकाल भस्मारती के समय निरंकारी हो जाते है, इसलिये महिलाआंे को उनकायह स्वरूप नहीं देखना चाहिये, लिहाजा मंदिर में प्राचीन समय से ही यह परंपरा विद्यमान है कि जब भी भस्मारतीहो, दर्शन लाभ लेने वाली महिलाएं अपना चेहरा घुंघट से ढंक लेती है। हालांकि यह कुछ ही क्षण के लिये होता हैबावजूद इसके इस परंपरा की जानकारी से वंचित यदि कोई महिला घुंघट ढंकती नहीं है तो परंपरा से परिचितआस-पास बैठी महिला या फिर पास बैठे पुरूष ही आवाज लगाकर घुंघट ढंकने के लिये कह देते है। 

महाकाल की भस्‍म आरती में कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर की लकड़‌ियों को जलाकर तैयार क‌िए गए भस्‍म का प्रयोग क‌िया जाता है। इन्हीं भस्‍म से हर सुबह महाकाल की आरती होती है। दरअसल यह भस्‍म आरती महाकाल का श्रृंगार है और उन्हें जगाने की व‌िध‌ि है।  मान्यता है क‌ि वर्षों पहले श्मशान के भस्‍म से भूतभावन भगवान महाकाल की भस्‍म आरती होती थी लेक‌िन अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है और अब कंडे के बने भस्‍म से आरती श्रृंगार क‌िया जा रहा है।