जानिए क्या है कार्तिक पूर्णिमा का महत्व, आज हुआ था गुरुनानक का जन्म

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नई दिल्ली: आज कार्तिक पूर्णिमा है. पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि भी मानी जाती है. इस तिथि के स्वामी स्वयं चंद्रदेव है. कार्तिक पूर्णिमा सनातन धर्म का बहुत अहम पर्व है. इस दिन महादेव ने त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया था. इसकी कारण इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है.

इस दिन नौ ग्रहों की कृपा आसानी से पायी जाती है

आपको बता दें कि इस दिन पवित्र नदी का स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा, आरती, हवन तथा दान का बहुत महत्व है. इस अवसर पर जल और वातावरण में विशेष उर्जा आ जाती है. इसलिए नदियों और सरोवरों में स्नान किया जाता है. इस दिन नौ ग्रहों की कृपा आसानी से पायी जाती है. कार्तिक मास वैसे भी बहुत पुण्य प्रदान करने वाला माह है.

ये दिन सिख धर्म के लिए भी काफी अहम

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व सिख धर्म में भी बहुत है. माना जाता है इस दिन सिखों के पहले गुरु, गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था. इस दिन को सिख धर्म में प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को गुरु नानक जयंती भी कहीं जाती है. इस दिन तमाम गुरुद्वारों में खास पाठ का आयोजन किया जाता है. सुबह से लेकर शाम तक कीर्तन चलते है और गुरुद्वारों के सात घरों में काफी रोशनी की जाती है. हर जगह लोगों लंगर भी देते है.

क्या है इस बार की पूर्णिमा की खास बातें

इस बार कृत्तिका नक्षत्र में चन्द्रमा की उपस्थिति होगी. बुध और बृहस्पति का संयोग भी बना रहेगा. बृहस्पति और चन्द्रमा का गजकेसरी योग भी होगा. कार्तिक की पूर्णिमा को स्नान और दीपदान करने से पापा का प्रायश्चित होगा.

जानिए किस प्रकार करें स्नान

सुबह के स्नान के बाद पूर्व संकल्प लें. फिर नियम और तरीकों से स्नान करें. स्नान करने के बाद सूर्य को अर्ध्य दें. इस दिन साफ और सफ़ेद वस्त्र धारण करें और फिर मंत्र जाप करें. मंत्र जाप के पश्चात अपनी आवश्यकतानुसार दान करें.