सवाल 6- भारत में कौन-कौन से छल-कपट सामान्य है ?

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भाइयों और बहनों जहां हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है वही कुछ चीजे ऐसी है जो हमें महान बनाती है अब क्या बताए छल कपट करने के तरीके आप लोगो ने बॉलीवुड फिल्मो में बहुत देखे होंगे लेकिन जो किस्से हम आपको बताने वाले है, जिन्हें पढ़ करके आपको मजा भी आएगा और पता भी चलेगा।

यह बात लगभग 10 वर्ष पुरानी है। एक गांव में दो व्यक्ति आए। उन्होने गांव की महिलाओ को पुराने बर्तनों के बदले नए बर्तन देने की पेशकश की। लेकिन शर्त यह थी कि नए बर्तन अगले दिन मिलेंगे। अधिकतर महिलाएँ इस बात पर सहमत नहीं हुई। लेकिन फिर भी 2–3 ने पुराने बर्तन उनको दे दिए।

अगले दिन 

समझौते का पालन करते हुए व्यापारी नए बर्तनों के साथ उपस्थित थे। यह बात पूरे गांव में आग की तरह फैल गई। पूरे गांव की महिलाएँ पुराने बर्तनों के साथ उपस्थित थी और अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थी। बर्तनों को हथौड़े से पीटा जा रहा था। शाम तक लोगों के चम्मच, भगौने, चमचे, तश्तरी व कटोरी ट्रक में लाचार अवस्था में लदी हुई थी। व्यापारी अगले दिन नए बर्तन देने का वादा करके चले गए।

मोबाइल आ गए , 2G से 5G आने वाला है अन्ना हजारे का आंदोलन हो गया, दिल्ली में अब शीला नहीं केजरीवाल जी और मोदी जी प्रधामंत्री भी बन गए लेकिन वो व्यापारी आज तक नजर नहीं आए।

एक ये भी किस्सा पढ़े और सबक भी लें

ये धोखा धड़ी अक्सर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास देखने मिलती है।

हम एक बार नई दिल्ली पहुंच कर स्टेशन के बाहर खाना खाने एक दुकान में गए। हमने आलू परांठे मंगाए। आर्डर लेने वाले व्यक्ति ने पूछा दही या सब्ज़ी? हमने एक दही और एक सब्ज़ी मंगवाई। पराठों के साथ वह छोटी कटोरियों में दही व सब्ज़ी दे गया। क्योंकि परांठे अक्सर दही के साथ खाए जाते है और छोटी छोटी कटोरियों में दिया गया था हमने मान लिया था कि वो पराठों के दाम में ही सम्मिलित है।

परंतु कुल देय रु ३००/- की हुई। ३ पराठों के रु ६०/- एवं रु १२०/- प्रत्येक दही व सब्ज़ी के। हमारी दुकानदार से बहस भी हुई कि न पहले दाम बताया गया न रु १२०/- छोटी छोटी कटोरियों के लिए न्यायसंगत है। परंतु दुकानदार अड़ गया कि हमने खाया है तो पैसा देना पड़ेगा। अंत में हार कर हम पैसे देकर निकल गए।

ये धोखा धड़ी कई जगह देखने मिलती है। हमेशा दाम के बारे में अच्छे से पूछताछ करें।

क्या आप कभी दूध खरीदने के लिए कोई रिटेलर की दुकान पर गए है ?

मुझे पूरा यकीन है की जो भी मेरा यह उत्तर पढ रहें है, कभी ना कभी दूध खरीदने के लिए गए ही हाेंगे|

अब प्रश्न यह है की दूध खरीदने का छल- कपट से क्या रिश्ता है??

भारत मैं एक कानून है की कोई भी दुकानदार कोई भी चीज एम.आर.पी.(MRP- Maximum Retail Price) से ज्यादा की कीमत पर नहीं बेच सकता। लेकीन जब आप दूध खरीदने के लिए जाते है तब क्या होता है? वह लोग आपसे एक रुपए ज्यादा लेते है और कहते है की यह रुपया फ्रीज की जो बिजली खचॆ होती है उसका है |

ऐसे छल – कपट भारत मे सामान्य है और हम इसके बारे मैं कुछ कर भी नहीं सकते क्योंकी अगर हमने आवाज उठाई तो यह लोग हड़ताल पे चले जाते है और तकलीफ हमें ही भुगतनी पडती है।

एक लिस्ट तैयार की है हमने एक नजर डाले

  1. कुछ महीनों में पैसे दोगुना और चौगुना करने वाली योजनाएं।
  2. उधार के नाम पर पैसे लेकर चंपत हो जाना।
  3. लड़कों का शादी के झांसे के बदले युवतियों का शारिरिक फायदा उठाना।
  4. लड़कियों का प्रेम के नाम पर लड़कों के पैसे पर ऐश करना।
  5. विकास के नाम पर नेताओं का वोट लेना।
  6. कोचिंग संस्थानों द्वारा झूठे परिणाम छापकर आगामी छात्रों को ठगना।
  7. टीवी पर दिखाए जाने वाले कई उत्पादों के भ्रामक प्रचार।

और इन सबके अलावा एक सबसे आम और मासूम धोखेबाज़ी-

मां-बाप द्वारा छोटे बच्चों को बाजार में किये जाने वाले वादे।

आशा है कि आपको अपना जवाब मिल गया होगा | आप लोग ऐसे ही हमसे सवाल पूछते रहिए हम उनका जवाब खोज कर आप को देंगे | आप कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमसे अपने सवाल पूछ सकते है | सवाल पूछने के लिए आप का धन्यवाद |