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क्या मेघनाद की मृत्यु लक्ष्मण जी के हाथों ही निश्चित थी? देखे वीडियो

(फोटो: IANS)

रामायण की कथा अपरम्पार है। 'मेघनाद' जो 'इंद्रजीत' के नाम से भी जाना जाता है, रावण का पुत्र था। अपने पिता की तरह यह भी स्वर्ग विजयी था। इंद्र को हारने के लिए ही ब्रह्मा जी ने इसका नाम इंद्रजीत रखा था।…

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मेघनाद अपनी पिता की भक्ति करता था। उसे यह पता चलने पर की राम स्वयं भगवान है फिर भी उसने पिता का साथ नही छोड़ा। मेघनाद की भी पितृभक्ति प्रभु राम के समान अतुलनीय है।

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त्रिदेव भी मेघनाद को नहीं मार सकते थे। राम, श्रीहरि के अवतार थे और श्रीहरि त्रिदेव में से एक हैं। इसलिए वह मेघनाद का वध नहीं कर सके। मेघनाद का वध लक्ष्मण ने ही किया। कहते हैं जब मेघनाद का जन्म हुआ तब…

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ब्रह्मा जी ने उसे वरदान भी दिया कि 'जो व्यक्ति 14 साल तक न सोया हो, उसने किसी स्त्री का चेहरा देखा और चौदह वर्ष खाना नहीं खाया हो वही व्यक्ति मेघनाद का संहार कर सकता है।'

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त्रेतायुग में लक्ष्मण ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे। जिन्होंने 14 वर्ष तक न अन्न खाया, न ही किसी स्त्री का चेहरा देखा और और ना ही 14 साल तक सोए थे। जब ये बात श्रीराम को पता चली तो उन्होंने लक्ष्मण से पूछा…

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