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आखिर बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को क्यों नष्ट कर दिया था?

(फोटो: IANS)

प्राचीन भारत में नालंदा विश्वविद्यालय उच्च् शिक्षा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विश्व विख्यात केन्द्र था. यह दुनिया का सबसे पुराने विश्वविद्यालय में से एक है. इसकी स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त वंश के श…

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महायान बौध धर्म के इस विश्वविद्यालय में हीनयान बौद्ध धर्म के साथ अन्य धर्मों की शिक्षा दी जाती थी और अनेक देशों के छात्र पढ़ने आते थे. अनेक पुराभिलेखों और सातवीं सदी में भारत भ्रमण के लिए आये चीनी यात्…

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हम आपको बता दें कि विश्व का यह प्रथम पूर्णत: आवासीय विश्वविद्यालय था और उस समय इसमें तकरीबन 10,000 विद्यार्थी और लगभग 2,000 अध्यापक थे. इसमें शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थी भारत के विभिन्न क्षेत्…

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नालंदा विश्वविद्यालय का पतन कैसे और कब हुआअभिलेखों के अनुसार नालंदा विश्वविद्यालय को आक्रमणकारियों ने तीन बार नष्ट किया था, लेकिन केवल दो बार ही इसको पुनर्निर्मित किया गया.

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पहला विनाश स्कंदगुप्त (455-467 ईस्वी) के शासनकाल के दौरान मिहिरकुल के तहत ह्यून के कारण हुआ था. लेकिन स्कंदगुप्त के उत्तराधिकारीयों ने पुस्तकालय की मरम्मत करवाई और एक बड़ी इमारत के साथ सुधार दिया था.

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दूसरा विनाश 7वीं शताब्दी की शुरुआत में गौदास ने किया था. इस बार, बौद्ध राजा हर्षवर्धन (606-648 ईस्वी) ने विश्वविद्यालय की मरम्मत करवाई थी.

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