चंबल में बन्दूकबाज़ी एक मर्दानगी का सबूत है लेकिन पचास के दशक तक, कोई भी पुरुष यह सोच भी नहीं सकता था कि एक महिला इन खाइयों में बंदूक रख सकती है और न केवल एक बंदूक रखने के लिए, बल्कि एक डाकू बनने के लि…
चंबल की कहानी में अपना मोड़ है। हम बात कर रहे हैं पुतलीबाई की जो चंबल के बीहड़ों में पहली महिला डकैत थी लेकिन जब तक एक महिला डकैत चंबल की महारानी नहीं बन जाती तब तक एक अजीब यात्रा होती है। एक बार मशहू…
धीरे-धीरे डाकू सुल्ताना पुतलीबाई को अपना दिल दे बैठा और उसके बाद वह डाकू सुल्ताना के साथ वहीं बीहड़ों में रहने लगी थी। सुल्ताना की मौत के बाद पुतलीबाई गिरोह की सरदार बन गई थी, पचास के दशक में उसका खूब…
पुतली बाई की ज़िदगी का सफर एक नाचने वाले व्यक्ति के साथ शुरू हुई। पुतुलीबाई घुंघरू द्वारा नृत्य और गायन के गीतों से प्रसन्न थी। चंबल के विद्रोहियों का मानना था कि गिरोह में किसी भी महिला का कोई स्थान…
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पुतलीबाई के नाचने गाने की ख्याति दूर-दूर तक थी। और बाद में चंबल में कई और महिलाओं ने पुतलीबाई की तरह डकैत बनने के लिए शामिल होने लगी थी और पुतलबाई के मरने तक महिलाओं का डकैत बनने का चलन बढ़ता रहा।
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