Breaking News Hindi

धर्म अफीम के समान है किसने कहा और क्यों ?

(फोटो: IANS)

दुनिया में कई धर्मों को मानने वाले लोग हैं. कुछ धर्मों में ऐसी भी बाते रही हैं, जिनका विरोध होता है. लेकिन एक बात जरूर है कि जब धर्मों की शुरूआत हुई , तो इनका उद्देश्य सकारात्मक ही था. लेकिन समय के सा…

(फोटो: IANS)

धर्म के बारे में अलग अलग समय पर कई दार्शनिकों ने अपने अलग अलग विचार प्रकट किए हैं. इसी कारण धर्म के बारे में किए गए कमेंट के बारे में लोगों के मन में बहुत जिज्ञासा होती है. इस वजह से लोगों के मन में इ…

(फोटो: IANS)

कार्ल मार्क्स ने धर्म को अफीम कहा था. यहां यह बात ध्यान देने की है कि यह लेख जर्मन भाषा में लिखा गया था. जिसमें कहा गया था कि धर्म अफीम के समान है. इसके अलावा यह लेख जर्मनी के संदर्भ में लिखा गया था.…

(फोटो: IANS)

अगर इस कथन की बात करें, तो इस पर सभी लोगों के अलग अलग मत हो सकते हैं. आस्तिक लोग इसको गलत साबित करने की कोशिश करते नजर आएंगे तथा नास्तिक लोग इसके समर्थन में खड़े हो सकते हैं. लेकिन अगर निष्पक्षतौर पर…

(फोटो: IANS)

जब इंसान धर्म में इतना अंधा हो जाता है कि वह तर्कों पर बात करने की अपनी ताकत ही खो देता है. जबकि धर्म में फैली रूढीयां समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगें. या फिर जब धर्म के नाम पर दंगें होते हैं.

(फोटो: IANS)

धर्म को अपनी मूंछों का सवाल बना लिया जाता है. इसके अलावा अगर एक लाइन में इसको समझने की कोशिश करें, तो जब धर्म सामंजस्य या एक दूसरे धर्म की इज्जत खत्म हो जाती है, तो वह अफीम से कम खतरनाक भी नहीं होता ह…

(फोटो: IANS)

पूरी खबर News4Social पर पढ़ें

(फोटो: IANS)
पूरी खबर पढ़ें →