मध्यप्रदेश के मुरैना जिला मुख्यालय से 41 किलोमीटर दूर पहाड़गढ़ क्षेत्र में है निचली बहराई गांव। इस गांव में गुर्जर, गुंसाई और आदिवासी समुदाय के परिवार रहते हैं। यहां गुर्जर और गुंसाई समुदाय के ज्यादातर…
निचली बेहराई गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मिथलेश का कहना है कि गांव की कुल आबादी 760 है जिसमें 353 महिलाएं एवं 407 पुरुष हैं। इनमें करीब 100 पुरुष ऐसे हैं जिनकी उम्र 20 से 40 वर्ष तक है लेकिन उनका ब्या…
बिलजी-पानी की समस्या के कारण पुरुष 35 साल के होने के बाद बी कुंवारे बैठे हैं।
बेटों की शादी की चाहत में पलायन कर रहे ग्रामीण- निचली बहराई गांव में अधिकांश परिवार पशुपालन एवं कृषि पर निर्भर हैं। इस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण साल में ज्यादातर वक्त जल संकट रहता…
बारिश के सीजन में नदी-नाले उफनने से रास्ता बंद हो जाता है। इन सब समस्याओं से तंग आकर 10 से 12 परिवार पलायन कर गए हैं। इसके पीछे दो मंशा हैं। एक तो काम-धंधा मिल जाए। दूसरा बच्चों का ब्याह हो जाए।
हर परिवार में हैं कुंवारे लड़के : बियावान जंगल में बसे इस गांव में नहर नहीं है। गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले ही तालाब-कुएं सूख जाते हैं। सिंचाई का साधन नहीं होने से खेत बंजर पड़े हैं। वहीं बिजली नहीं…
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