हिमालय की चारधाम यात्रा को सतयुग तुल्य माना गया है, क्योंकि चलना ही जीवन है और ठहर जाने का नाम मृत्यु।चारधाम यानी बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा का सीधा संबंध मन, विचार और आत्मा की…
यही वजह है कि जब हम चारधाम की यात्रा पर होते हैं, तो प्रकृति के स्वच्छ-निर्मल एवं नयनाभिराम नजारों के बीच जीवन की सभी सांसारिक उलझनों को पीछे छोड़ देते हैं।यह ऐसे क्षण हैं, जब हम न सिर्फ तनावमुक्त हो…
इसलिए हरिद्वार को गंगाद्वार भी कहा गया है। यहीं देवभूमि के प्रथम दर्शन भी होते हैं और यात्री मां गंगा को प्रणाम कर निकल पड़ता है मोक्ष के पथ पर। चारधाम यात्रा का प्रथम पड़ाव है यमुनोत्री धाम। यमुनाजी…
उत्तराखंड के चारों धाम पवित्र नदियों पर स्थित हैं. बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी पर, केदारनाथ धाम मन्दाकिनी नदी पर, गंगोत्री धाम भागीरथी पर और यमुनोत्री धाम यमुना नदी पर. इन चारों धामों पर देश की जनता आसान…
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