संस्कृति

जानिए, बद्रीनाथ धाम से जुड़े हुए कुछ खास तथ्य !

(फोटो: IANS)

बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड सृष्टि का आठवां वैकुंठ धाम कहलाता है. इस धाम के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगना शुरू हो जाती है. बता दें कि यह हिन्दुओं के चार धामों में से एक धाम है, जो अलकनंदा न…

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आइए जानते है बद्रीनाथ से जुडी कुछ खास बाते बद्रीनाथ धाम से जुड़ी एक मान्यता है कि 'जो आए बदरी, वो न आए ओदरी'. इसका मतलब जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन एक बार कर लेता है उन्हें दोबारा माता के गर्भ में नह…

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बद्रीनाथ धाम दो पर्वतों के बीच बसा है. इन्हें नर नारायण पर्वत कहा जाता है. कहा जाता है कि यहां भगवान विष्णु के अंश नर और नारायण ने तपस्या की थी. नर अपने अगले जन्म में अर्जुन तो नारायण श्री कृष्ण के रू…

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कहा जाता है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलते समय मंदिर में जलने वाले दीपक के दर्शन का खास महत्व होता है. ऐसा माना जाता है कि 6 महीने तक बंद दरवाजे के अंदर देवता इस दीपक को जलाए रखते हैं.

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बद्रीनाथ के पुजारी शंकराचार्य के वंशज होते हैं. जब तक यह लोग रावल पद पर रहते हैं इन्हें ब्रह्माचर्य का पालन करना पड़ता है. इन लोगों के लिए स्त्रियों का स्पर्श वर्जित माना जाता है.

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केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि बद्रीनाथ के रावल के निर्देशन में उखीमठ में पंडितों द्वारा तय की जाती है. इसमें सामान्य सुविधाओं के अलावा परंपराओं का भी ध्यान रखा जाता है. यही कारण है कि कई बार ऐसे भी म…

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