संस्कृति

जानिए क्या है भगवद् गीता के श्लोकों का राज

(फोटो: IANS)

सभी लोग जानते है कि भागवत् गीता को दुनिया का सबसे बड़ा ग्रंथ माना जाता है. धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र…

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आइये जानते है "गीता" के श्लोकों के बारे में और मनुष्य के जीवन में उनका क्या महत्त्व

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतु र्भूर्मा ते संगोस्त्वकर्मणि ।।

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भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं. इसलिए तू कर्मों के फल हेतु मत हो और कर्म न करने के विषय में भी तू आग्रह न क…

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योगस्थ: कुरु कर्माणि संग त्यक्तवा धनंजय। सिद्धय-सिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते।

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अर्थ : हे अर्जुन। कर्म न करने का आग्रह त्यागकर, यश-अपयश के विषय में समबुद्धि होकर योग युक्त होकर, कर्म कर, समत्व को ही योग कहते हैं. मनुष्य के जीवन में महत्त्व: धर्म का अ…

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