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गोवर्धन परिक्रमा में क्या है मुखारविंद का इतिहास?

(फोटो: IANS)

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गोवर्धन की परिक्रमा का कलयुग में विशेष महत्व है. गोवर्धन पर्वत को गिरिराज भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि गोवर्धन पर्वत योगेश्वर भगवान का साक्षात स्वरूप है. बड़ी संख्यों में भक्तों द्वारा इसकी परि…

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गिरिराज गोवर्धन को योगेश्वर भगवान का साक्षात रूप माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि एक बार इंद्र का अपनी शक्तियों पर बहुत घमंड हो गया था. ब्रजवासी इंद्र की पूजा करते थे. लेकिन कृष्ण भगवान उनको गोबर की पू…

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ब्रज की जनता को इससे बचाने के लिए भगवान कृष्ण द्वारा 7 दिनों तक अपने वाम हाथ की कनिष्ठा अंगुली के नख पर इस पर्वत को धारण किया गया था. गिरिराज गोवर्धन की यह परिक्रमा अनंत फलदायी व पुण्यप्रद होती है.गिर…

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मुखारविंद के बारे में मान्यता है कि यहां से परिक्रमा शुरू की जाती है तथा यहीं पर खत्म की जाती है. गोवर्धन की परिक्रमा वैसे तो कहीं से भी प्रारंभ की जा सकती है किंतु मान्यता अनुसार गिरिराज गोवर्धन की प…

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मानसी गंगा- ऐसा माना जानता है कि कृष्ण भगवान के बुलाने पर दीपावली के दिन गोवर्धन में गंगा प्रकट हुई थी. मान्यता है कि कृष्ण भगवान द्वारा मन से प्रकट करने के कारण ही इसका नाम मानसी गंगा पड़ा. गोवर्धन द…

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