धर्म का अर्थ होता है, धारण, यानी जिसे धारण किया जा सके. गुणों को जो प्रदर्शित करे वह धर्म है. धर्म को गुण भी कहा जा सकता हैं. शायद ही ऐसे कुछ ही लोग होगें जो धर्म के बारे में जानते होगें. धर्म एक संस्…
"धार्यते इति धर्म:" इसका मतलब है जो धारण करते है वहीं धर्म कहलाता है अथवा लोक और परलोक के सुखों की सिद्धि के लिए सार्वजनिक पवित्र गुणों व कर्मो को धारण करना ही धर्म माना गया है. दूसरे शब्दों में यह भी…
जैमिनी मुनि के मीमांसा दर्शन के दूसरे सूत्र को भी धर्म का लक्षण कहा जाता है. बता दें कि मीमांसा दर्शन हिन्दुओं के छः दर्शनों में से एक है. इस शास्त्र का 'पूर्वमीमांसा' व वेदान्त का 'उत्तरमीमांसा' भी क…
कहा जाता है कि वैदिक साहित्य भारतीय संस्कृति के प्राचीनतम स्वरूप पर प्रकाश डालने वाला विश्व का प्राचीनतम् साहित्य है. वैदिक साहित्य में धर्म वस्तु के स्वाभाविक गुणों और कर्तव्यों के अर्थो में भी आया ह…
मनु स्मृति में धर्म की परिभाषा धृति: क्षमा दमोअस्तेयं शोचं इन्द्रिय निग्रह: धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्म लक्षणं इसका अर्थ है धैर्य, क्षमा, मन को प्राकृतिक प्रलोभनों में फंसने से रोकना, चोरी त्याग,…
धारणाद धर्ममित्याहु:,धर्मो धार्यते प्रजा: इसका अर्थ है धारण किया जाएं और जिसने प्रजाएं धारण की हुई हैं. वहीं धर्म है. यतोअभयुद्य निश्रेयस सिद्धि: स धर्म: इसमें कहा गया है कि जिससे लोकोन्नति और मोक्ष क…
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