हम हमेशा झांसी की रानी लक्ष्मी बाई की बात करते हैं। उनकी शौर्य गाथा गाते हैं। लेकिन क्या किसी को पता है कि जिस बच्चे को कमर में बांधकर रानी लक्ष्मी बाई लड़ी थी उस बच्चे का…
आपको बता दें कि जिस बच्चे को कमर में बांधकर रानी लक्ष्मी बाई लड़ी थी वह उनका अपना बेटा नहीं था। बल्कि यह राजा राव गंगाधर राव के चचेरे भाई का बेटा था। रानी लक्ष्मी बाई को ब…
जब गंगाधर राव बच्चे को गोद ले रहे थे तब वहाँ ब्रिटिश राजनीतिक अधिकारी भी उपस्थिति थे। ब्रिटिश अधिकारीयों को महाराजा की ओर से एक पत्र दिया गया था जिसमें निर्देश दिया गया थ…
18 जून 1858 को कोटा की सेराई में रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के बाद दामोदर जिन्दा रहे । ब्रिटिश के भय से वह घोर गरीबी में जंगल में अपने कुछ शुभ चिंतकों के साथ रहे। दामोदर र…
इसके बाद दामोदर राव ने झालरापाटन में शरण ले ली थी। उनकी मुलाक़ात कुछ पुराने विश्वासपात्रों की मदद के कारण झालरापाटन के राजा प्रतापसिंह से हुई। एक पुराने विश्वासपात्र नेनखा…
अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद, उन्हें इंदौर भेजा गया। इधर स्थानीय राजनीतिक एजेंट सर रिचर्ड शेक्सपियर ने दामोदर को उर्दू, अंग्रेजी और मराठी सिखाने के लिए मुंशी…
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