धर्म की संकल्पना को लेकर गांधी की समझ कितनी स्पष्ट और समाहक थी, उसकी एक बानगी देखिये - 'यह धर्म का सौभाग्य अथवा दुर्भाग्य है कि वह कोई सत्तारोपित मत नहीं है. अतः अपने आपको किसी गलतफहमी से बचाने के लिए…
सत्य की अथक खोज का दूसरा नाम हिंदू-धर्म है.यदि आज वह मृतप्राय, निष्क्रिय अथवा विकासशील नहीं रह गया है तो इसलिये की हम थक कर बैठ गए हैं और ज्यों ही यह थकावट दूर हो जायेगी त्यों ही हिन्दू धर्म संसार पर…
'यंग इंडिया' में उन्होंने लिखा भी कि,'सिवाय अपने जीवन के और किसी अन्य ढंग से हिन्दू धर्म की व्याख्या करने के योग्य मैं खुद को नहीं मानता.' मुझे नहीं लगता कि गांधी के अलावा किसी और में यह स्वीकार करने…
गांधी खुद कहते हैं कि 'हिन्दू धर्म सभी लोगों को अपने-अपने धर्म के अनुसार ईश्वर की उपासना करने को कहता है, और इसीलिए इसका किसी धर्म से कोई झगड़ा नहीं है. हिन्दू धर्म अनेक युगों का विकास फल है. हिन्दू लो…
ऐसे में ज़ाहिर है कि खुले दिमाग और व्यापक दृष्टिकोण वाले गांधी को बिना जाने-समझे मूढ़ बुद्धि और अज्ञानी लोग आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे. वे स्वीकार करें भी तो कैसे? हमें समझना ही होगा कि महात्मा गांधी…
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