महात्मा गाधी और नेताजी सुभाषचंद्र बोस दोनों ही देश के सच्चे सपूत थे. जो अपनी अंतिम सांस तक देश के निर्माण और आजादी के लिए लड़ते रहे. अंत में दोनों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. लेकिन क्या…
नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्तित्व से महात्मा गांधी जी बहुत प्रभावित थे. जिसके कारण 1938 ई. में हरिपुरा में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में सुभाषचंद्र बोस के अध्यक्ष बनने का उन्होंने बहुत समर्थन किया. यह…
इस मतभेद को बढाने के काम राष्ट्रीय नियोजन समिति ने किया. जिसका गठन नेताजी ने किया था. इस समिति का उद्देश्य औद्योगिकरण पर आधारित भारत के आर्थिक विकास के लिए बड़े स्तर पर योजना बनाना था. जिसका सीधा सा म…
नेताजी सुभाषचंद्र बोस का मानना था कि 1939 में जब दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ, तो हम अंग्रेजो पर दबाव डालकर उनको घुटनों पर लाने को मजबूर कर सकते हैं. इसके लिए उनका या किसी गरम दल के नेता का कांग्रेस अध्य…
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अध्यक्ष पद के लिए चुनाव जीतने के बाद भी सुभाषचंद्र बोस ने ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि देश के महानतम् व्यक्ति का विश्वास प्राप्त नहीं कर सके तो उनकी जीत निरर्थक है.
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