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अच्छे दिन आने से लेकर 'चौकीदार' बनने तक का ढोंग

(फोटो: IANS)

2014 के दौरान लोकसभा चुनाव का दौर याद कीजिये. चारो तरफ विकास और तथाकथित ‘अच्छे दिन’ लाने की गूँज थी. वर्तमान प्रधानमंत्री और उस समय भाजपा द्वारा घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी में ही…

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असल में बहुमत मिलना एक बड़ी जिम्मेदारी भी होती है. आपको उन उम्मीदों पर खरा उतरना होता है, क्योंकि चुनाव तो हर पांच साल में होते हैं, हुक्मरानों को हर पांच सालो में जनता की अदालत में आना पड़ता है. ये ठ…

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नोटबंदी की अगर बात करें तो छोटे धंधो को चौपट करने का काम सरकार के इसी फैसले ने किया है. जो धंधे नकदी लेन-देन और उधारी पर चलते थे, उन व्यापारियों के पास तो बंद होने के सिवाय कोई रास्ता ही नहीं बचा था.…

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आकड़ो की ही जानिब से आगे बढ़ें तो पाएंगे की बेरोजगारी की रिपोर्ट्स अपने चरम पर है, 1991 के उदारीकरण के बाद से युवा सबसे अधिक बेरोजगार है. 23 मई को जो भी सरकार चुनी जायेगी उसके सामने भारत की अर्थव्यस्थ…

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गुमराह करने की राजनीति, और मुद्दों से भटकाव शायद भारतीय राजनीति की यही नियति बन चुकी है, फिलहाल जनता का फैसला आने में अभी वक़्त है. 23 मई को क्या होता है, देश का फैसला उसी से होगा.

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