हिन्दुओं की प्राचीन और पवित्र मंदिर में से एक जगन्नाथ मंदिर का इतिहास काफी अनूठा है। जगन्नाथ मंदिर विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी के पूर्वी छोर पर बसी प…
आपने कभी सोचा है कि इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ यानि कृष्ण के साथ राधा साथ न होकर बलराम और सुभद्रा क्यों है तथा पुरी के मंदिर में भगवान कृष्ण, बलराम और सुभद्रा की आंखें फैली हुई क्यों हैं? तो चलिए आज ह…
एक बार माता यशोदा , माता देवकी के साथ द्वारका पधारीं। वहां कृष्ण की रानियों ने माताओं से कृष्ण के बचपन की लीलाओं को सुनाने की बात कही उनके साथ बहन सुभद्रा भी उस वक़्त मौजूद थी। माता यशोदा ने कहा कि वह…
भगवान की लीला के कथा सुनाने में सब इतने विलीन हो गए की अपनी सुध-बुध खो बैठे। सुभद्रा को भी पता नहीं चला कि कब भगवान श्री कृष्ण और बलराम वहां आ गए और उनके साथ ही कथा का आनन्द लेने लगे। बचपन की मधुर लील…
सुभद्रा की भी यही दशा हुई वह आनंदित हो कर कृष्णा की कथा में लीन होगई। उसी समय श्री नारदजी वहां पधारे। किसी के आने का अहसास होते ही कथा रुक गई। नारदजी भगवान संग बलराम और सुभद्रा के ऐसे रूप को देखकर मोह…
जगन्नाथ पुरी में भगवान का यही रूप मौजूद है जिसमें वह अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ हैं। परंतु यह स्वरुप भी आधा अधूरा सा क्यों है इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है।
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