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पिता बनने की आशा ।

(फोटो: IANS)

भारत में सदियों से देखा जाता है कि जब भी किसी दंपति के संतान नहीं होती है, तो सबसे पहले पत्नी को दोषी ठहराया जाता है और उसे बाँझ जैसे ताने दिए जाते है। छोटे कस्बो और शहरों की बात करे तो पुरुषो की जांच…

(फोटो: IANS)

ऐसे व्यक्ति जो सीधे गर्म वातावरण के सम्पर्क में रहते है तथा काम करते है- जैसे हलवाई, सुनार, जहा भट्टी की गर्मी से अंडकोष में शुक्राणु की संख्या में गिरावट देखी गई है।

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बच्चो में देखे कि दोनों अंडकोष थैली में है या नहीं अन्यथा कभी-कभी अंडकोष एक अथवा दोनों थैली में नीचे नहीं आते है तथा शरीर कि गर्मी से अंडकोष खराब हो जाते है और वो बच्चे नि:संतानता के शिकार हो जाते है।

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जंक फ़ूड, रसायन मिश्रित खाद्य पदार्थ, फ़ास्ट फ़ूड का ज्यादा सेवन करने से विटामिन की कमी हो जाती है, जिससे शुक्राणुओं की मोटिलिटी में कमी आ जाती है।

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मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन तथा निरंतर पैरो पर लैपटॉप रख कर काम करने वाले पुरुषो में भी शुक्राणुओं की कमी तथा नि:संतानता का खतरा रहता है।

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शराब, धूम्रपान एवं अन्य कोई नशा करने पर भी स्पर्म कम हो जाते है। जरूरत से ज्यादा शराब पिने से स्पर्म की संख्या में कमी आ जाती है।

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