31 मार्च को पब्लिक डोमेन में ‘नमो टीवी’ को लांच किया गया. वैसे तो इस टीवी के न तो मालिक का कुछ अता-पता है न ही इसके लाइसेंस सम्बन्धी मुद्दों का. चुनाव आयोग ने वैसे तो इस मसले पर सवाल पूछा है और जिम्मे…
शायद ये ऐसा पहला ही मौका होगा जब भारत में बिना किसी लाइसेंस के एक टीवी चैनल एक पार्टी विशेष का प्रचार कर रहा है. ये स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि ये भारत के प्रधानमंत्री के साथ जुड़ा हुआ है.
इसके अलावा अगर हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयानबाजी की बात करें तो उसका स्तर इन सबसे कहीं ऊँचा है. फिर चाहे वो “मोदी जी की सेना” वाला बयान हो या फिर अभी कल एक रैली को संबोधित करते हुए वो अली और…
आखिर राजनेताओं को ऐसे बयान देने की आवश्यकता क्यों है? क्या हम भारत में एक सकारात्मक राजनीती की कल्पना भी नही कर सकते हैं?
ये सिर्फ एक दल की राजनीती का चेहरा नही है बल्कि अगर हम उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बयानों पर ध्यान दे जिसमे उन्होंने मुस्लिम वोटों को न बटने की बात सभा में बोली.
कमोबेस सभी पार्टियों के नेता एक दूसरे को लफ्फाज़ी के इस खेल में पिछाड देना चाहते हैं. चाहें वो कल्याण सिंह का बयान हो जब उन्होंने कहा कि “हम सभी भाजपा के कार्यकर्ता हैं और हमें मोदी जी को एक बार फिर स…
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