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मध्यप्रदेश में इतिहास नें खुद को फिर दोहराया

(फोटो: IANS)

कहते है की इतिहास खुद को दोहराता रहता है। वह किसी न किसी रुप में खुद को दोहराता है। युद्र से लेकर सामाजिक बदलाव में इतिहास नें हमेशा ही खुद को अलग-अलग समय पर दोहराया है। बात अगर राजनीती में इतिहास की…

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अब हम उस इतिहास की बात करेंगे, जिसनें आज खुद को दोहराया है।

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साल 1993 में कुछ इसी तरह से कांग्रेस नें मध्यप्रदेश में बीजेपी को हराकर सत्ता अपने नाम की थी। जब उस वक्त माधव राव सिंधिया के मुख्यमंत्री बनने की संभावना थी। लेकिन वे बन नहीं पाए उनकी जगह दिग्विजय सिंह…

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दिग्विजय सिंह उस समय प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष थे. 1993 नवंबर में विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस को अप्रत्याशित रूप से जीत हासिल हुई. इस जीत के बाद मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में श्यामा चरण शुक्ल, माधव…

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कहा तो यह भी जाता है कि माधवराव को रोकने के लिए अर्जुन सिंह और दिग्विजय सिंह ने स्वांग रचा था. हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं है. राजनीतिक विश्लेषक गौरी शंकर राजहंस बताते हैं कि दिग्विजय को श्यामा चरण श…

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भारी कशमकश के बीच विधायक दल की बैठक शुरू हुई जिसमें मुख्यमंत्री का चुनाव होना था. वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एनके सिंह की मानें तो अर्जुन सिंह ने पिछड़ा वर्ग से मुख्यमंत्री बनने की वकालत करते…

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