दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी महिला की पोशाक का चुनाव उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है और इसे उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न जैसी गैर-कानूनी हरकत…
यह मामला एक युवती के आरोपों से जुड़ा था, जिसमें उसने साजिद अली पर बार-बार पीछा करने, यौन टिप्पणी करने और अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष द्वा…
सुनवाई के दौरान जब युवती से उसके कपड़ों के बारे में सवाल किए गए, तो उसने बताया था कि वह आमतौर पर 'सामान्य जींस और टॉप' पहनती है। जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने इस तरह की पूछता…
न्यायाधीश ने जोर देकर कहा, "कोई लड़की या महिला क्या पहनती है, यह उसकी निजी पसंद का मामला है। न तो उसके पड़ोसियों, न समाज, न आरोपी और न ही अदालत में पेश होने वाले वकील को…
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि महिलाओं के पहनावे को लेकर दकियानूसी सोच की न्यायिक कार्यवाही में कोई जगह नहीं है। इसे चरित्र हनन या पीड़िता को ही दोषी ठहराने के लि…
बचाव पक्ष ने धर्म और स्थानीय रीति-रिवाजों का हवाला भी दिया, जिसे जस्टिस सुधा ने "पूरी तरह से अस्वीकार्य" बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि गैर-कानूनी व्यवहार को सह…
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