सवालों का जवाब देने के लिए हम आपकी खिदमत में हाज़िर हो गए हैं। आप में से कई
लोगों से एक अहम व ज़रूरी सवाल पूछा है कि ‘मुसलमान वंदे मातरम क्यों नहीं बोलते हैं’। ज़ाहिर है कि जिन लोगों ने ये सवाल किया है उनमें से
ज़्यादातर बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक होंगे। तो चलिए जानते हैं कि मुस्लिम समुदाय
1- वंदे मातरम् संस्कृत, बांग्ला भाषा में रचित ‘आनन्दमठ उपन्यास’ का एक हिस्सा है, जिसमें देवी दुर्गा को राष्ट्र के तौर पर पेश किया गया है और यह इस्लाम की बेसिक फिलॉस्फी के बिल्कुल ख़िलाफ़ है क्योंकि इस…
2- वहीं, वंदे मातरम् का मतलब होता है ‘माता की वन्दना करना’। मगर इस्लाम में सिर्फ एक ही ख़ुदा की इबादत करने की बात कही गई है। वहां किसी देवी-देवताओं का ज़िक्र नहीं है।
आज़ादी के लिए संघर्ष के दिनों में यह गीत हर तरफ़ तेज़ी फैल रहा था। वहीं, उस
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