शनि और मंगल दोनों की गिनती पाप ग्रहों में होती है। कुंडली में इनकी अशुभ स्थिति भाव फल का नाश कर व्यक्ति को परेशानियों में डाल सकती है, वहीं शुभ होने पर वे व्यक्ति को सारे सुख दे डालते हैं।शनि व मंगल प…
शनि-मंगल युति-प्रतियुति जीवन में आकस्मिकता का समावेश कर देती है। वैवाहिक जीवन, नौकरी, व्यवसाय, संतान, गृह सौख्य इनसे संबंधित शुभ-अशुभ घटनाएँ जीवन में अचानक घटती हैं। अचानक विवाह जुड़ना, अचानक प्रमोशन,…
इस युति के जातक कभी स्थायित्व प्राप्त नहीं करते, उन्नति व अवनति भी अचानक घटती रहती है। अन्य ग्रहों की स्थिति अनुकूल होने पर भी कम से कम आयु के 36वें वर्ष तक कष्ट व अस्िथरता बनी ही रहती है, फिर धीरे-…
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