एम्स निदेशक के हवाले से देश के तमाम मीडिया चैनल और सोशल मीडिया में एक बयान चल रहा था - "जून-जुलाई में अपने चरम पर होगा कोरोना- डॉ. रणदीप गुलेरिया।केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने…
लेकिन ये पीक क्या है- इसका मतलब कहीं नहीं समझाया जा रहा। उस पीक में रोज़ कितने मामले सामने आएंगे, इस पर भी कोई बात नहीं हो रही। हर कोई इस बयान को अपने हिसाब से समझ रहा है। कोई कह रहा है अब लॉकडाउन आगे…
रणदीप गुलेरिया का जवाब था, "अभी तो केस बढ़ रहे हैं। पीक तो आएगा ही। पीक कब आएगा, ये मॉडलिंग डेटा पर आधारित होता है। कई एक्सपर्ट ने इसकी डेटा मॉडलिंग की है। इंडियन एक्सपर्ट ने भी की है और विदेशी एक्सपर…
दरअसल, डॉ. रणदीप गुलेरिया का पूरा बयान सुनने पर ये साफ़ हो जाता है कि उनके बयान का आधार मैथेमेटिकल डेटा मॉडलिंग है। लेकिन वो कौन-सी डेटा मॉडलिंग है, कहां के एक्सपर्ट ने की है? क्या ये उनके ख़ुद की है?…
प्रोफेसर शमिका रवि अर्थशास्त्री हैं और सरकार की नीतियों पर रिसर्च करती हैं। वो प्रधानमंत्री के इकोनॉमिक एडवाइज़री काउंसिल की सदस्य भी रही हैं।कोरोना काल में वो हर रोज़ कोरोना की ग्राफ़ स्टडी करते हुए…
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