वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में आई नरमी का असर भारत के थोक बाज़ार पर भी दिखा है, जिससे जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर में मामूली गिरावट दर्ज की…
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की मुख्य वजह ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में आई कमी है, हालांकि खाने-पीने की चीजों और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी…
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में महंगाई दर में नरमी का सबसे बड़ा कारण 'ईंधन और ऊर्जा' श्रेणी में कीमतों का तेज़ी से घटना रहा। इस श्रेणी में महंगाई जून के 27.41 प्रतिशत से घट…
खाद्य और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई बरकरार
एक तरफ जहां ईंधन सस्ता हुआ, वहीं दूसरी ओर विनिर्मित यानी फैक्ट्रियों में बने उत्पादों की महंगाई जुलाई में बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई। माना जा रहा है कि उद्योग अपनी बढ़ी हुई…
इसी तरह, खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर भी 5.4 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी रही। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई 8.52 प्रतिशत और खाद्य उत्पाद निर्माण क्षेत्र में यह 8.89 प्रतिशत दर…
पूरी खबर News4Social पर पढ़ें