तमिलनाडु की राजधानी का प्रबंधन देखने वाला ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) एक बड़े राजकोषीय घाटे से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निगम के खर्च…
अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक निगम का कुल घाटा 1,763 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। अगर इसमें ऋण के मूलधन का भुगतान भी जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा बढ़कर 1,970 करोड़ रु…
अधिकारियों के अनुसार, इस वित्तीय दबाव की सबसे बड़ी वजह राजस्व खर्च में बेतहाशा वृद्धि है। यह खर्च 2022-23 में 3,581 करोड़ रुपए था, जो 2025-26 तक 5,676 करोड़ रुपए तक पहुंच…
संकट को और गंभीर बनाने वाला एक अन्य कारण सरकारी मदद में भारी कटौती है। विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली पूंजीगत अनुदान सहायता 2022-23 में 1,941 करोड़ रुपए थी, जो 2025-26…
बाहरी फंडिंग में कमी के कारण, जीसीसी को बुनियादी ढांचे के कामों के लिए अपने आंतरिक संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस वजह से राजस्व खाते से पूंजी खाते में फंड ट्रांसफ…
इस स्थिति ने निगम में नकदी का संकट पैदा कर दिया है। 29 जुलाई तक, निगम पर बिना भुगतान वाले बिलों की कुल राशि 1,929.72 करोड़ रुपए थी। अनुमान है कि चालू वित्तीय वर्ष में लगभ…
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